words per minute
18
sonuSaini1353092
00:00
Speed
हैदराबाद में वीभत्स सामूहिक दुष्कर्म कांड के चारों आरोपियों को पुलिस मुठभेड़ में मार गिराए जाने की घटना ने संसद से लेकर सड़क तक बहस तेज कर दी। पूरा देश इसी घटना पर ध्यान केंद्रित किए हुए हैं। पुलिस अधिकारियों की मानें तो पुलिस इन चारों आरोपियों को रिमांड पर लेने के बाद विवेचना के क्रम में उन्हें घटनास्थल पर ले गई थी। इसी दौरान आरोपियों ने पुलिस पर आक्रमण कर भागने का प्रयास किया। पुलिस ने भी आत्मरक्षा में गोली चलाई और अंततोगत्वा चारों पुलिस मुठभेड़ में ढेर हो गए। इस मुठभेड की खबर सामने आते ही लोग पक्ष और विपक्ष में खड़े हो गए हैं। एक समूह कह रहा है कि यही होना चाहिए था। उसने पुलिस को बधाई भी दी। हैदराबाद में तो जश्न जैसा मनाया गया। दूसरा समूह यह कह रहा है कि यह औचित्यपूर्ण नहीं है। पुलिस को और सावधानी बरतनी चाहिए थी। सवाल उठाए जा रहे हैं कि आखिर किन परिस्थितियों में प्रात:काल आरोपियों को घटनास्थल पर ले जाया गया। क्या वांछित पुलिस बल नहीं था। ऐसा क्या हुआ कि पुलिस को गोली चलानी पड़ी और चारों आरोपियों को निष्क्रित करना पड़ा। संदेह भरे सवाल उठना स्वाभाविक हैं, परंतु कानूनी स्थिति है, उसे समझ लेना चाहिए। व्यक्तिगत सुरक्षा या किसी अन्य की सुरक्षा अथवा जीवन को खतरे के आधार पर वांछित बल का प्रयोग किया जा सकता है। यह अधिकार भारतीय दण्ड संहिता ने प्रदान किया है, लेकिन बल प्रयोग का यह अधिकार मनमाना नहीं है। यदि आनुपातिक बल का प्रयोग नहीं किया गया तो यह अधिकार समाप्त हो जाता है।