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sonuSaini1353092
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एक दिन एक शख्स एक पेड़ पर चढ़ गया। थोड़ी देर बाद उसे लगा कि यहां से नीचे उतरना उतना आसान नहीं है। उसने नीचे उतरने की काफी कोशिश की, लेकिन वह कुछ खास नहीं कर पाया। अब उसके पास बस एक ही रास्ता था कि वह पेड़ से कूद जाए लेकिन पेड़ इतना ज्यादा ऊंचा था कि उसे लगा कि अगर कूदने की कोशिश की तो चोट लग सकती है। कोई चारा न देख उसने आसपास से गुजर रहे लोगों से मदद मांगी, लेकिन किसी को कोई तरीका नहींं सूझा। वहां लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई। तभी भीड़ में से मुल्ला नसीरुद्दीन निकलकर बाहर आए और बोले - घबराओ मत। मैं कुछ करता हूं। मुल्ला ने एक रस्सी उस आदमी की तरफ फेंकी और बोले कि इस रस्सी को अपनी कमर में कसकर बांध लो। नीचें खड़े लोग बोले कि भला यह कौन सा तरीका हुआ। कुछ ही देर में उस आदमी ने रस्सी को अपनी कमर में बांध लिया। मुल्ला ने रस्सी का दूसरा छोर पकड़कर खींचा। ऐसा करते ही वह आदमी पेड़ से धड़ाम से नीचे आ गिरा। गिरने से उसे बहुत चोट आईं। लाेेग मुल्ला पर भड़क गए और बोले : बेवकूफ आदमी, यह क्या किया तूने? मुल्ला ने भोलेपन से कहा : मैंने पहले भी एक आदमी की इसी तरीके से जान बचाई है, लेकिन मुझे यह याद नहीं आ रहा कि उसे मैंने कुएं में से बचाया था या पेड़ पर से?
मुल्ला नसरूद्दीन तुर्की में रहने वाले एक बुद्धिमान दार्शनिक थे जिन्हें उनके किस्से कहानियों के लिए जाना जाता है कहा जाता है कि उनका जन्म 1208 ईसवी में तुर्की के होरतो नामक एक गांव में हुआ था और साल 1285 में उनकी मृत्यु हो गई । माना जाता है कि मुल्ला नसरूद्दीन सूदखोरों, जबरन कर वसूलनें वालों और दुष्ट दरबारियों के कट्टर दुश्मन थे। वह अत्याचार करने वालों कों अपनी बुद्धिमानी से ऐसा सबक सिखाते थे जिसे वह जीवन भर नहीं भूलते थे।