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ManojKumar1737407


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्रत्‍येक स्‍वतंत्र राष्‍ट्र में जहां लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍था जीवित है, वहां सुधारों को लेकर व्‍यापक जन-आंदोलन किए जाने की परंपरा भी मौजूद रहती आई है। इस कारण यह तो संभव ही नहीं था कि सूचना के अधिकार को लेकर जन-आंदोलन किए गए हों। लेकिन सर्वप्रथम हमें यह समझना चाहिए कि 15 अगस्‍त, 1947 को ब्रिटिश गुलामी का जुआ उतार फेंकने के भी लगभग 58 वर्षों पश्‍चात सूचना का अधिकार इतने विलंब से क्‍यों लागू हो पाया ? जाहिर है कि आजादी के पश्‍चात भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस ने देश की बागडोर अपने हाथों में थाम ली थी। ब्रिटिश कुशासन ने देश को आर्थिक स्‍तर पर तबाह और बर्बादी की स्थिति में पहुंचा दिया था। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने समाजवादी विचाराधारा के साथ देश पर शासन करना आरंभ किया। आजादी के बाद भारतवर्ष के लिए संविधान की आवश्‍यकता थी। वैसे तो भारतीय संविधान में कई देशों के संविधानों से कुछ कुछ लिया गया था। किंतु इंग्‍लैंड के अलिखित संविधान से हमारा संविधान सबसे ज्‍यादा प्रभावित रहा था। देश के विभाजन के समय 30 लाख लोगों को अपनी जिंदगी से हाथ धोना पड़ा था तो करोड़ों लोगों को अपनी मातृभूमि से भी पलायन करने को विवश होना पड़ा था। सदियों तक गुलाम रहने के कारण भारतीय लोगों में आजाद होने के पश्‍चात राष्‍ट्रीय सोच एवं उत्‍तरदायित्‍व की भावना इसी कारण पैदा नहीं हो उनकी प्रत्‍येक मांग को पूर्ण करेंगे। बेशक, वह राष्‍ट्र निर्माण का समय था और कई फैसलों को कठोरता से लागू करने की भी आवश्‍यकता थी। इस सम्‍य से तो कौन इंकार कर सकता है कि कोई भी राष्‍ट्र उसके निवासियों की लालसाओं से ज्‍यादा बड़ा महान होता है। यही कारण है कि आजादी के पश्‍चात नागरिकों को सुशासन दिया जाना था, देश को उन्‍नति के पथ पर प्रशस्‍त भी करना था। लेकिन यह तभी मुमकिन था, जब सभी प्रकार के अंतर्विरोधों से मुक्‍त रह कर देश निर्माण का कार्य किया जाता। पंडित नेहरू ने महान पंचवर्षीय योजनाओं के द्वारा देश को महानता के पथ पर आरूढ़ करने का कार्य आरंभ किया। उस समय 1952 में प्रथम आम चुनाव भी संपन्‍न हुए और कांग्रेस के अलावा भी कई अन्‍य दलों ने देश में अपनी उपस्थिति दर्शाई। बेशक, वर्चस्‍व तब कांग्रेस का ही था। सरदार वल्‍लभ भाई पटेल ने भारतवर्ष के गठन में महत्‍वपूर्ण भूमिका का निर्वाह किया था। उनका तानाशाह प्रशासन की आवश्‍यकता है, जो लोगों में राष्‍ट्रप्रेम का चरित्र स्‍थापित कर सके। तब उनके इस कथन को अप्रसंगिक नहीं माना गया था
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