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AdarshRajput
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एक नगर में बहुत ही अमीर आदमी रहता था. उस आदमी ने अपना सारा जीवन पैसे कमाने में लगा दिया, लेकिन उसने अपने पूरे जीवन में कभी किसी की मदद नहीं की। वह पैसे कमाने में इतना व्यस्त एवं मस्त हो गया कि उसे उसके बुढ़ापे का भी पता नहीं चला। इस तरह उसके जीवन का अंतिम दिन भी नजदीक आ गया। यमराज को देखकर वह आदमी डर गया। उसने कहा, “प्रभु, अभी तक तो मैंने अपना जीवन जिया भी नहीं, मैं तो अभी तक अपने काम में व्यस्त था, अतः मुझे अपनी कमाई हुई दौलत का उपयोग करने के लिए समय चाहिए।” यमराज ने उत्तर दिया, मैं तुम्हें और समय नहीं दे सकता, तुम्हारे जीवन के दिन समाप्त हो चुके हैं। यमराज की बात सुनकर उस आदमी ने कहा, प्रभु मेरे पास इतना पैसा है, आप चाहो तो आधा धन लेकर मुझे जीवन का एक और वर्ष दे दीजिए। प्रतिउत्तर में यमराज ने कहा, ऐसा संभव नहीं। इस पर आदमी ने कहा, आप चाहें तो मेरा 90 प्रतिशत धन लेकर मुझे एक महीने का समय ही दे दीजिए। यमराज ने मना कर दिया। फिर आदमी ने कहा, आप मेरा सारा धन लेकर एक घंटा ही दे दीजिए। तब यमराज ने उसको समझाया, बीते हुए समय को धन से दोबारा प्राप्त नहीं किया जा सकता। उसे अपने धन पर अभिमान था, अब उसे वह सब व्यर्थ लगने लगा, क्योंकि उसने अपना पूरा जीवन उस व्यर्थ चीज को कमाने में लगा दिया, जो आज उसे जिंदगी का एक घंटा भी खरीद कर नहीं दे पाई। दुखी मन से वह अपना मौत के लिए तैयार हो गया।