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जब मैं बाहर निकलकर उस गांव की तरफ तेजी से चल पड़ा तो यों महसूस हुआ, जैसे रात आसमान फअ पड़ा हो। मेरे अंदाजे से कहीं ज्यादा पानी और कीचड़ जमा था। रास्ते में इतनी फिसलन थी कि मैं एक-दो बार गिरते-गिरते बचा। मैंने गांव पहुचकर अंडे, आटा घी, दुध , चाय पत्ती और गए मुर्गी की खरीददारी की। मुर्गी की जिबह करवा के उसकी सफाई में कुछ वक्त लग गया। जब वापस पहंचा तो एक घंटे से ज्यादा वक्त गुजर चुका था। नीलम बेचैनी से मेरा इंतजार कर रही थी। हम दोनों ने अंडे परांठे बनाए खाकर चाय पी मुर्गी दोपहर के लिए रख दी। तीरसरे पहर हमें चल पड़ना था । नीलम ने बातों -बातों में मुझे बताया कि वह नृत्य, संगीत तैराकी जूडो -कराटे, भ्रमण और फिल्मों की शौकीन थी। अंग्रेजी उपन्यास रोज ही पढ़ती थी। उसने चाय की चुस्कियां लेते हुए मुझसे पूछा क्या आप पढ़े-लिखे हैं मैंने कहा मैंने पांच साल पहले ग्रेजुएशन किया था।
मैंने आपकी बातचीत से यह अंदाजा लगा लिया था कि आप पढ़े़ लिखें हैं, नीलम ने अपनी पहकें झपकाई, लेकिन आपने यह यह पेशा क्यों अख्तियार कर रखा है ताकि आपसे मुलाकात हो जाए जी पहले तो वह मेरी बात नहीं समझी फिर उसके गालों की रंगत और गहरी हो गई। उसने शर्माने के अंदाज में सिर झुका लिया, आप यह पेशा छोड़ क्यों नहीं देते
मैं खुद इस पेशे से तंग आ गया हूं हालात की मजबूरियों ने मुझे बांध रखा है।
मैं मम्मी से कहकर आपको किसी अच्छे फर्म में नौकरी दिलवा दूंगी मम्मी चाहें तो आपको अपने कारोबार में शरीक कर सकती हैं या नौकरी दे सकती हैं। मैं आपकी और आपकी मम्मी का शुक्रगुजार हूं ।
हम बातें कर ही रहे थें कि सहसा मैंने एक आवाज सुनी । नीलम भी चौंक पड़ी हम दोनें ने अपने कान उस तरफ लगा दिए , तो पता चला कोई गाड़ी थी, जो हमारी तरफ आ रही थी। नीलम के चेहरे का रंग फक हो गया। वह गश्ती फौज की जीप हो सकती थी जो रेलवे लाइन के पास से आ रही थी।
मैंने
घबराओ नहीं मैंने नीलम को तसल्ली दी, अगर वो लोग अंदर आए, तो हमें अपने आपको पुरसुकून जाहिर करना होगा। मैं उन्हें बताऊंगा कि हम विमल चौधरी के महमान हैं।
नीलम की आवाज गले में फंसने लगी, अगर उन लोगों ने मुझे आवाज से पहचान लिया तो कह देना कि हम मियां-बीवी हैं मैंने नीलम की पीठ थपथपाई वे लोग बीमल चौधरी को जानते होंगें कुछ देर बाद कायामत की घड़ी आ ही गई। जीप बड़ी तेजी से झोपड़ी के सामने रूकी जीप से एक साथ कई आदमी कूदे थे। दरवाजे के पास पहुंचकर एकाएक किसी ने दरवाजे पर ठोकर लगाई। कमजोर दरवाजा टूट गया । चार आदमी अंदर दाखिल हुए यह देखकर मैंने इत्मीनान की सांस ली कि वे फौजी नहीं थें। उनको जिस्मों पर शहरी लिबास थे।
दो आदमी दरवाजे पर पहरेदार बन कर खड़े हो गए थे़ । उनकें हाथें में रिवाल्वर था। वे बदमाशें की तरह दिखाई दे रहे थे। लेकिन जो दो आदमी हमारे सामने थे, उनमें से एक एक शख्स छरहरे बदन और ऊंचे कद का था। दूसरा शख्स ठिगने कद का था मौटा और भद्दा वे दोनें दौलतमंद लगते थे ठिगने कद के आदमी के चहरे और आंखें में एक अजीब सी कमीनगी छाई हुई थी। उसने लंबे कदवाले अपने साथी से कहा यह रही मिस निलोफर नीलम कहकर पुकारा जाता है।
नीलम ने उन लोगों को पहचान लिया था वह घबराकर मेरे पीछे आ गई उसने जैसे अपने आपको मेरी पनाह में दे दिया था। उसने मेरी गर्दन के पीछे से सरगोशी की ये मुझे जिंदा नहीं छोड़गा।
अभी कहानी और है अगले भाग में मिलेगी आगे की कहानी ।