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JaswantSingh2138893
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उप-सभापति महोदय, सबसे पहले तो मैं आप के प्रति कृतज्ञता प्रकट करता हूँ, कि आप ने इस विषय पर मुझे बोलने का अवसर दिया। आज इस विषय का महत्व और बढ़ गया है क्योंकि पिछले साल देश के 12 से भी अधिक राज्यों में सूखे का प्रभाव ररहा और तीन-चार राज्य पूरी तरह से बाढ़ से ग्रसित रहे। महोदय, उसका दुष्परिणाम न अभी देश पर से समाप्त हुआ है, न उस इलाके के किसानों पर से समाप्त हुआ है।
एक बात का मैं और उल्लेख करना चाहता हूँ कि एक के बाद एक नई घोषणाएँ की गई, जैसे अभी मंत्री महोदय ने कीमतों में वृद्धि की घोषणा की। मैं बैठे-बैठे उन दरों को देख रहा था। मेरी एक बात समझ में नहीं आई कि भारत की कृषि में जूट और पटसन का कोई स्थान है या नहीं है। इन में किसी वृद्धि का उल्लेख नहीं किया गया है। लेकिन अब तक देश के अंदर कई बार बीमा की चर्चा हो चुकी है। मैं आप से कहना चाहता हूँ कि जिस प्रदेश से में आता हूँ उसे बाढ़ ने तीन-चार बार बरबाद किया है और अभी इसी साल पांचवी बार किसानों को मार्च और अप्रेल के अंत में ओलों नें बुरी तरह से बरबाद कर दिया है। अन्य कई प्रदेशों को भी बरबाद कर दिया है। हम अगर फसल बीमा की चर्चा करते हैं तो इस फसल बीमा का जो वास्तविक लक्ष्य है वह पीडि़त किसानों को बचाना है, उनको राहत पहुंचाना है। इसलिए मैं सरकार से कहना चाहता हूँ कि आप सीमान्त और लघु किसानों से लाभ की आकांक्षा मत कीजिए बल्कि केन्द्रीय सरकार फसल की किस्त के लिए राज्य सरकार को विवश करें कि इसके लिए वह आगे आए।
महोदय, देश का जो किसान है उस में से लगभग 80 प्रतिशत किसान सीमान्त और लघु किसान हैं और केवल 20 प्रतिशत किसान ऐसे हैं जो लघु और सीमान्त किसानों के ऊपर हैं। देश के अंदर खेती योग्य जितनी जमीन है उसका 80 प्रतिशत लधु और सीमान्त किसानों के हाथ में है। अभी हमारे मित्र ने इस देश की आबादी के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि अभी तक हमारी आबादी का 80 प्रतिशत गाँवों में है जो खेती पर निर्भर है। उस के पास कोई दूसरा साधन नहीं है। वह या तो लघु किसान है या खेतिहार मजदूर है। अन्य कोई काम उसके पास न होने से उसकी अवस्था खराब हो गई है। कभी बाढ़ उसे तबह कर देती हैं, कभी सूखा पड़ता है हर तरह से उसके खेतों को ही नुकसान होता है। किसान बीच लेकर गया, खेत में डाला तो सूखा पड़ गया। फसल अच्छी हुई तो बाढ़ आ गई, खेत डूब गया, घर भी डूब गया। इस प्रकार किसान ऋण के बोझ से परेशान है और वह आज आत्महत्या करने पर विवश हैं। सचमुच में अगर आप किसानों को बचाना चाहते हैं, उन को आगे बढ़ाना चाहते हैं तो मैं निवेदन करना चाहूँगा कि आप इस पर विचार करें।