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devilalKhoradia


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ुनिया में लॉकडाउन के समय पंछियों की दुनिया में भी अच्‍छे बदलाव हुए हैं। उनकी दुनिया पहले से ज्‍यादा हसीन और रहने लायक हुई है। इसका असर उनकी आवाज में महसूस होने लगा है। व्‍यवहार पारिस्थितिकी विज्ञानी लिज डेरीबेरी की टीम को पंछियों का अध्‍ययन करते हुए दिलचस्‍प नतीजे मिले हैं। पहले यह जान लेना जरूरी है कि डेरीबेरी करीब एक दशक तक सफेद कलगी वाली गौरैया का अध्‍ययन कर चुकी हैं। उन्‍होंने विस्‍तार से इस बात को सामने रखा था, समय के साथ बढ़ रहे शहरी शोर ने संवाद करने की पंछियों की क्षमता को कैसे बाधित किया है। ऐसे में, यह एक खुशखबरी है कि लॉकडाउन के वक्‍त पंछियों की आवाज ज्‍यादा खुशनुमा हुई है। जब महामारी के कारण सैन फ्रांसिस्‍को के लोग घरों के अंदर थे, तब यह अध्‍ययन शुरू किया गया। पंछियों और विशेष रूप से गौरैया की आवाजों का पीछा किया गया, उन्‍हें रिकॉर्ड किया गया। महामारी के पहले की उनकी रिकॉर्ड आवाज से नई आवाज की तुलना की गई और पाया गया कि पंछियों के स्‍वर पहले की तुलना में ज्‍यादा मधुर और मुखर हुए हैं। महामारी से पहले मानवी शोरगुल में उनकी आवाज वैसे ही दब जा रही थी, जैसे नक्‍कारखाने में तूती। सैन फ्रांसिस्‍कों की सूनी पड़ी सड़कों पर पंछियों की आवाज रिकॉर्ड करके डेरीबेरी और उनके सहयोगियों ने खुलासा किया कि लॉकडाउन के समय पक्षियों की आवाज की गुणवत्‍ता दक्षता, दोनों में नाटकीय रूप से सुधार हुआ है। खासकर नर पक्षी ज्‍यादा सुरीले हुए हैं, उन्‍हें अपने क्षेत्र की रक्षा नया साथी खोजने के लिए अपने गीत-संगीत का सहारा लेना पड़ता है। टेनेसी यूनिवर्सिटी के शोधार्थी बताते हैं कि जितना अनुमान था, उससे कहीं ज्‍यादा पंछियों की आवाज बदली है। इससे पता चलता है, ध्‍वनि प्रदूषण किस तरह पंछियों की आवाज और दुनिया को नुकसान पहुंचाता है। यदि हम अनावश्‍यक शोर-गुल और प्रदूषण पर लगाम लगा दें, तो पंछियों की पुरानी दुनिया फिर गुलजार हो जाएगी, जिससे हमें भी लाभ होगा। साइंस पत्रिका में प्रकाशित शहरी वन्‍य जीवों पर महामारी के प्रभावों का वैज्ञानिक रूप से मूल्‍यांकन करने वाला यह पहला शोध है। यह अनुसंधान के एक जटिल क्षेत्र पर प्रकाश डालता है संकेत करता है कि मानव निर्मित शोर ने कैसे पूरी प्रकृति को बाधित कर दिया है। आज मानव सभ्‍यताएं हरेक प्रकार के प्रदूषण बढ़ाने में जुटी हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि कुछ ही महीनों में पंछियों के व्‍यवहार-आवाज में बदलाव महसूस किया जा सकता है, तो लंबे समय तक यही माहौल मिले, तो पूरे जीव जगत को फायदा होगा। दुनिया मधुर ध्‍वनियों से सराबोर हो सकती है।
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