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AnkitBhatnagar
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सभापति महोदय, लगने के बाद कुआं खोदने की जो प्रथा है वह बंद होनी चाहिए। मैंसमढता हूं कि पहले जो राजा थे वे सोचते थे कि दूसरे लोगा प्रशिक्षएा नहीं ले सकते हैं। लेकिन सवाल यह नहीं है सवाल है देश में नया अनुशासन पैदा करने का तथा नई सेना खड़ी करे हमें प्रशिक्षण देना चाहिए आज कल लोगों मे एक हीनता की भावना आ गई है। मैं समझता हूं कि यह प्रशिक्षण इसलिए जरूरी हे कि लोगों में ए नया वल एक नया जोश और एक नया अनुशासन पैदा हो । आज भी हम सुनते है कि गांवों में हरिजनों पर अत्याचार होते हैं, हरिजनों पर पजो हमले वहाँ होते उनका मुकाबला यवह लोग नहीं कर सकते हैं क्यांकि उनकों राइफल चलाने का ज्ञान नहीं है। आज शांति पूर्ण रिजनों पर अत्याचार होते हैं मैं तो यहां तक कहता हूं कि पुरूषों कोही नहीं महिलाओं को भी यह प्रशिक्षण मिलना चाहिए। आज हम 20 करोड़ रूपये अपनी रक्षा पर खर्च करते हैं इसके बजाये अगर देश का बच्चा बच्चा जानदार आदमी बन जाये और राइफल का प्रशिक्षण लिए हुए हो तो मैं समझता हूं कि इतना पैसा देश के विकास के काम में खर्च हो सकता है लेकिन हमने कभी भी इस बात को नहीं सोचा । पहले जो इस देश के बड़े –बड़े लोग थे उन्होने अपनी राइफल ले ली, उन्होंने उसको चलाने का प्रशिक्षण ले लिया, यह समझकर कि यह काम किसही खास जाति का है। मेरा विचार यह है कि आज देश आज जो हरिजन आदि लोग है उनमें एक बात घ्ज्ञर कर गई है कि राइफल और बंदुक उनक बस की बात नहीं है ।