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lokendranargave
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हम देख रहे हैं कि मनुष्यों में निराशा हावी होती जा रही है। इंसान खुद पर से भरोसा खो रहा है। कई मौकों पर इंसानों ने ताकत का भद्दा दिखावा किया है। अतीत की घटनाएं इसकी प्रतीक हैं। लेकिन अभी भी उम्मीद बाकी है। मनुष्य कभी इतना दुर्बल नहीं होता कि वह बेहतरी के लिए खड़ा न हो सके। उम्र के एक पड़ाव के बाद कुछ लोग बदलने से इंकार कर देते हैं, पर बदलना हमेशा मुमकिन होता है, बशर्ते स्वभाव के बदलने में उसका विश्वास हो। जब अंधेरा होता है, तभी आपको तारे नजर आते हैं। इसलिए जीवन के अंधियारे में भी उम्मीद के तारे रोशन रखिए।
यदि मनुष्य अपनी इच्छाओं को परमेश्वर की इच्छाओं के साथ एकाकार करके ईश्वर के उद्देश्य में उसका साथ दे, तो दुनिया बदल सकती है। यीशू मानवों की प्रकृति में बदलाव की संभावनाएं हमेशा देखते थे। उन्होंने मानवता के भीतर अनंत संभावनाओं का समुंदर देखा है। भले आपको पूरी सीढ़ी न दिखे, लेकिन जब विश्वास से पहला कदम उठाते हैं, तभी यात्रा शुरू हो जाती है। विश्वास और प्रेम पूरक हैं। प्रेम ही इकलौती ताकत है, जो शत्रु को मित्र बना सकती है। जो इंसान क्षमा करना नहीं जानता, वह प्रेम की अनुभूति से हमेशा वंचित रहेगा। हमें माफ करने का साहस होना चाहिए।
विज्ञान अनुसंधान करता है, तो धर्म व्याख्या करता है। विज्ञान ज्ञान देता है, जिससे ताकत मिलती है, तो धर्म से विवेक पैदा होता है और इससे जीवन पर नियंत्रण। विज्ञान जहां तथ्यों पर चलता है, धर्म मूल्यों पर। ये दोनों विरोधी नहीं साझेदार हैं। यदि आप उड़ नहीं सकते हो, तो दौड़ो। यदि दौड़ नहीं सकते हो, तो चलो। यदि चल भी नहीं सकते हो, तो रेंगो। लेकिन हमेशा आगे बढ़ते रहो।