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हाल ही में उच्चतम न्यायालय ने विनोद दुआ मामले में, वर्ष 1962 के केदार नाथ सिंह मामले में लगाए गए राजद्रोह कानून की फिर से पुष्टि की है, और सरकार को इसके पालन का आदेश दिया है। केदारनाथ मामलें में भारतीय दंड संहिता 124ए के अंतर्गत व्याख्यायित देशद्रोह की संवैधानिक वैधता को सही ठहराया गया था। भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए चार आधार पर देशद्रोह कानून लगाने की अनुमति प्रदान करती है। कहे गए शब्द, लिखित, इशारे या प्रदर्शन के आधार पर सरकार के खिलाफ घृणा फैलाना या उसको उकसाना या अवमानना करने को राजद्रोह माना जा सकता है।
अब केवल संस्था में अध्ययनरत् छात्रों के लिये ही हिन्दी अंग्रेजी के अभ्यास उपलब्ध कराये जायेंगे। बुद्ध अकादमी टीकमगढ़, बाहरी छात्रों को इस सुविधा के लिये भुगतान करना होगा।