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विचारण न्यायालय द्वारा यह निष्कर्ष दिया गया है कि घटना स्थल छतरपुर रोड़ स्थित लोक मार्ग पर स्वागत गेट के पोल के पास ही प्रश्नगत वाहन बरामद किया गया है। अभियुक्त ने मोटरयान अधिनियम की धारा 133 के दिये गये सूचना पत्र प्रदर्श पी 5 में दुर्घटना के समय प्रश्नगत वाहन को स्वयं चलाया जाना स्वीकार किया है। वाहन घटना स्थल से चलाये जाने योग्य नहीं होने की अवस्था में पुलिस द्वारा जप्त कर जप्ती पत्र बनाया था। उपरोक्त सभी परिस्थितियों में दुर्घटना अभियुक्त द्वारा किया जाना प्रमाणित है। परिस्थितियां स्वयं प्रमाण होती हैं, इसलिए अभियोजन का मामला युक्तियुक्त संदेह के परे प्रमाणित है और अभियुक्त को उपरोक्तानुसार विचारण न्यायालय द्वारा दोषसिद्ध किया गया है।
अभियुक्त के विद्वान अधिवक्ता का तर्क है कि अभियुक्त को झूंठा फंसाया गया है। परिस्थितियां स्वयं बोलती है, सिद्धांत को लागू कर अभियुक्त की ओर से ऐसा कथन नहीं दिया है कि अभियुक्त को तेज गति, लापरवाही से दुर्घटना के समय वाहन चलाये जाते हुए देखा गया था, जिन भी साक्षियों के कथन कराये गये हैं, वह सभी मृतक के रिश्तेदार हैं और ग्राहय किये जाने योग्य नहीं है। अभियुक्त के विरूद्ध कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं है। धारा 133 मोटरयान अधिनियम के अंतर्गत अभियुक्त द्वारा दिया गया सूचना पत्र का जवाब अभियुक्त के विरूद्ध साक्ष्य में ग्राहय नहीं किया जा सकता है। बिना यह प्रमाणित हुये कि दुर्घटना के समय वाहन किस प्रकार उतावलेपन या उपेक्षा से चलाया जा रहा था, अभियुक्त को उसके वाहन मालिक होने के आधार पर दंडित नहीं किया जा सकता है, इसलिए अभियुक्त को दोषमुक्त किया जावे।
प्रस्तुत किया गया है, जिसमें दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित किया गया है कि मोटरयान अधिनियम की धारा 133 के अंतर्गत दिये गये सूचना पत्र का जवाब का उपयोग बतौर सस्वीकृति के अभियुक्त के विरूद्ध नहीं किया जा सकता। रामकृष्ण विरूद्ध दिल्ली राज्य का मामला प्रस्तुत किया गया है।