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भियुक्‍त के विद्वान अधिवक्‍ता का तर्क है कि अभियुक्‍त को झूंठा फंसाया गया है। पूर्व रंजिश थी, अभियुक्‍त अत्‍यंत गरीब व्‍यक्ति है और लंबे समय से न्‍यायिक अभिरक्षा में है। अभियोजन साक्षियों ने न्‍यायालय पुलिस के समक्ष परस्‍पर भिन्‍न कथन दिये हैं। साक्षियों के कथन विश्‍वास किये जाने योग्‍य नहीं हैं, इसलिए अभियोजन का मामला युक्तियुक्‍त संदेह के परे प्रमाणित नहीं है। अत: अभियुक्‍त को दोषमुक्‍त किया जावे। लोक अभियोजक का तर्क है कि मुन्‍नीबाई को चाकू से चोट पहुंचाई गयी थी, जिसकी चिकित्‍सीय साक्ष्‍य से और अन्‍य साक्षियों के कथनों से संपुष्टि हुई है। विचारण न्‍यायालय द्वारा अभिलेख पर उपलब्‍ध साक्ष्‍य के आधार पर दोषसिद्धि का निष्‍कर्ष निकाला है, जो कि उचित है। दोषसिद्धि का दंडादेश स्थिर रखा जावे।
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