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ManalalDasoriya
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हम भोजन के संबंध में हानि-लाभ की कुछ बातें जानते हैं, परंतु वायु जो भोजन से भी अधिक आवश्यक है, उसके संबंध में बहुत ही कम जानते हैं। स्वास्थ्य रक्षा के लिये प्राण-वायु यानी आँक्सीजन जितनी आवश्यक है, उतनी और कोई वस्तु नहीं। हम लोग बासी भोजन खाना पसंद नहीं करते, किंतु बासी और गन्दी वायु के परहेज पर हम ध्यान नहीं देते। आँक्सीजन ऐसी खुराक है जिसका महत्व खाने पीने की अन्य चीजो की अपेक्षा बहुत अधिक होता है। सुवित्र शरीर शास्त्री डाक्टर रोडस्मंड के अनुसार यह बात असत्य है कि ह्रदय के द्वारा रक्त का दौरा होता है, पर सच बात यह है कि प्राण –वायु ही रक्त में मिल कर उसे दौरा करने की शक्ति देता है। मनुष्यु के शरीर को अपना काम चलाने के लिये जिस शक्ति की जरूरत होती है वह कहां से आती हे, उस विषय मे धुरन्धर शरीर शास्त्री डाक्टर बरनर मेकफेडन के अनुसंधान के अनुसार प्रत्येक श्वास के साथ हम जो वायु खींचते हैं उसके साथ एक विघुत शक्ति शरीर में जाती है और वह विघुत शक्ति अन्य कोई वस्तु नहीं आँक्सीजन का ही परिवर्तित रूप है। जब आँक्सीजन रक्त में मिलती है, तो स्त्रायु मंडल उसे ग्रहण कर लेता है और स्त्रायविक केन्द्र में पहुंचा देता है और उसी की शक्ति से शरीर के सारे काम चलते हैं। भोजन पचाने, बातचीत करने, चलने-फिरने जैसे कार्य इसी शक्ति से पूरे किये जाते हैं। दिमागी काम करने वालों को भी दिमागी ताकत पाने और उन्नत करने का प्रयत्न करना चाहिये और इसके लिए ध्यान रखना चाहिए के मानसिक श्रम मे भी स्नायविक शक्ति व्यय होती है, यह शक्ति शारीरिक स्वास्थय एवं स्नायु विधुत से ही आती है। उस श्त का मूल स्त्रोत आँक्सीजन है, जो शीत-ऋतु में आप किसी मोहल्ले में चले जाइये, सारे वातायन बंद मिलेगे, लोग अपने कमरे बंद करके उनके अंदर मुंह ठककर सो रहे होंगे यह पर्था स्वास्थय के लिये बहुत ही हानिकर है। इस बात की परीक्षा आप स्वयं कर सकते हैं, बंद कमरे में मुंह ढक कर सोने पर सुबह उठते है शरीर भारी – सा लगेगा। तन्द्र और आलस्य छाए होंगे ।