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श्रम न्यायालय यह भी दर्ज करता है कि अपीलकर्ता को अवधि के लिए उपस्थिति रजिस्टर/ड्यूटी चार्ट प्रस्तुत करने के निर्देश के बावजूद, अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए गए थे। इसके अलावा श्रम न्यायालय ने कामगार द्वारा दायर हलफनामे और अप्रैल और मई 2005 के ड्यूटी चार्ट की एक प्रति जुलाई 2004 के वेतन भुगतान रजिस्टर की एक प्रति और कार्यभार ग्रहण रिपोर्ट और जारी किए गए प्रमाण पत्र की एक प्रति का भी उल्लेख किया है। अपीलार्थी द्वारा सभी शपथ पत्र केे साथ संलग्न है। इन दस्तावेजों की फोटोकॉपी अपीलकर्ता से सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत एक सूरज राम द्वारा प्राप्त की गई थी। श्रम न्यायालय ने पहले प्रतिवादी के ओकुलर सबूत को भी ध्यान में रखा कि उसने 11.04 के समाचार पत्र के विज्ञापन के अनुसार उक्त पद के लिए आवेदन किया था। 2003 और उसके बाद 01.09.2003 को 2950/- रूपये के मासिक वेतन पर अपीलकर्ता अस्पताल में वार्ड बॉय के रूप में नियुक्त किया गया। अपीलकर्ता के विद्वान अधिवक्ता ने प्रस्तुत किया कि प्रथम प्रतिवादी ने दूसरे प्रतिवादी को प्रत्यर्थी संख्या 3 के रूप में श्रम न्यायालय लखनऊ के समक्ष और विवाद के विवरण के पैरा 19 में ठेका श्रम (विनियमन और उन्मूलन) को संदर्भित किया था। अधिनियम 1970 उक्त पैराग्राफ में यह कहा गया है कि अपीलकर्ता और द्वितीय प्रतिवादी न तो पूर्वोक्त अधिनियम के तहत पंजीकृत थे और न ही श्रम विभाग द्वारा जारी पंजीकरण प्रमाण पत्र था। वर्तमान अपील के अनुलग्नक पी-1 की ओर हमारा ध्यान आकर्षित किया गया जो उप श्रम आयुक्त लखनऊ उत्तर प्रदेश द्वारा जारी प्रपत्र संख्या 6 की एक प्रति है, जिसके द्वारा दूसरे प्रतिवादी को उक्त अधिनियम के तहत लाइसेंस प्रदान किया गया था। लाइसेंस में संशोधन की तारीख, नवीनीकरण के लिए भुगतान की गई फीस और समाप्ति की तारीख का उल्लेख है।