words per minute

35

9131220870


00:00

Speed

पीलकर्ता आरोपी है। अपीलकर्ता पर भारतीय दण्‍ड संहिता 1860 (संक्षिप्‍त आईपीसी के लिए) की धारा 302 और 201 के तहत दण्‍डनीय अपराधों के लिए मुकदमा चलाया गया था। तदर्थ अतिरिक्‍त सत्र न्‍यायाधीश-3 बाघा पश्चिम चंपारण ने अपने निर्णय एवं आदेश दिनांक 29 अगस्‍त 2013 द्वारा अपीलकर्ता को दोनों अपराधों के लिए दोषी ठहराया। अपीलकर्ता को भारतीय दण्‍ड संहिता की धारा 302 के तहत दण्‍डनीय अपराध के लिए आजीवन कारावास और 5000/- रूपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। अर्थदण्‍ड देने पर तीन माह का कठोर कारावास भुगतने का निर्देश दिया। आई.पी.सी की धारा 201 के तहत दण्‍डनीय अपराधों के लिए उन्‍हें तीन साल के कठोर कारावास और 5000/- रूपये का जुर्माना देने का निर्देश दिया गया। अर्थदण्‍ड देने पर तीन माह का कठोर कारावास भुगतने का निर्देश दिया। विद्वान सत्र न्‍यायाधीश ने निर्देश दिया कि दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। विद्वान तदर्थ अतिरिक्‍त सत्र न्‍यायाधीश के निर्णय से व्‍यथित होकर अपीलार्थी ने पटना उच्‍च न्‍यायालय के समक्ष अपील दायर की। पटना उच्‍च न्‍यायालय की एक खण्‍डपीठ ने दिनांक 22 अप्रैल 2019 के आक्षेपित निर्णय और आदेश द्वारा अपीलकर्ता द्वारा प्रस्‍तुत अपील को खारिज कर दिया और विद्ववान सत्र न्‍यायाधीश के निर्णय को बरकरार रखा। उक्‍त दो निर्णयों से व्‍यथित होकर अपीलार्थी ने वर्तमान अपील प्रस्‍तुत की है। संक्षेप में कहा गया है कि अभियोजन पक्ष का मामला यह है कि 18 नबम्‍बर 2011 को यह बताया गया कि अपीलकर्ता की पत्‍नी की जलने से मौत हो गई। श्री महेश साह द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर उसी दिन अप्राकृतिक मौत का मामला (संक्षेप में ''यू.डी. मामला'') दर्ज किया गया था। 18 नवंबर 2011 को पीडब्‍ल्‍यू नबंर 9 डॉ अशोक कुमार तिवारी द्वारा शव परीक्षण किया गया था। पोस्‍टमॉर्टम रिपोर्ट के दौरान मौत का कारण 'हाथ से गर्दन के आसपास दबाव और कुंद पदार्थ' के कारण दम घुटना रहा।
words per minute
0
wpm
accuracy
0%
Text Practice - Time 404 - English

words per minute