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durgesh_raj_vishwaka


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अपील कलकत्‍ता उच्‍च न्‍यायालय की डिवीजन बेंच के 25 जनवरी 2019 के फैसले से उत्‍पन्‍न होती है। डिवीजन बेंच ने कोलकत्‍ता नगर निगम के 3 जुलाई 2012 के एक परिपत्र को बरकरार रखा, जिसमें डिप्‍लोमा और डिग्री धारक सब असिस्‍टेंट इंजीनियर्स के लिए अलग-अलग शर्तें निर्धारित की गई थीं। सहायक अभियंता के रूप में अतिरिक्‍त नियुक्तियां आक्षेपित परिपत्र के अनुसरण में तैयार की गई 5 जुलाई 2012 की पदक्रम सूची को भी बरकरार रखा गया है। अपीलकर्ताओं, जो इंजीनियरिंग में डिप्‍लोमा रखने वाले एसएई हैं, ने उच्‍च न्‍यायालय के समक्ष एक रिट याचिका दायर की जिसमें 3 जुलाई 2012 के परिपत्र और ग्रेडेशन सूची को इस आधार पर चुनौती दी गई कि एसएई के एक ही कैडर के भीतर अतिरिक्‍त पदों पर नियुक्ति के उद्देश्‍य से वर्गीकरण किया गया था। भारत के संविधान के अनुच्‍छेद 14 और 16 का उल्‍लंघन करता हे। 6 अक्‍टूबर 2015 के एक निर्णय द्ववारा उच्‍च न्‍यायालय के एकल न्‍यायाधीश ने रिट याचिका की अनुमति दी और परिपत्र को मनमाना और असंवैधानिक ठहराया। एक पत्र पेटेंट अपील में डिवीजन बेंच ने एकल न्‍यायाधीश के फैसले को उलट दिया और कहा कि सहायक अभियंता के उच्‍च पद पर अधिसंख्‍य नियुक्तियों के लिए शैक्षिक योग्‍यता के आधार पर किया गया वर्गीकरण मान्‍य है। चयन प्रक्रिया में एक लिखित परीक्षा शामिल होती है, जिसके बाद नगर सेवा आयोग द्वारा आयोजित एक साक्षात्‍कार होता है। इसके आधार पर मेरिट लिस्‍ट तैयार की जाती है। अधीनस्‍थ इंजीनियरिंग सेवा के कैडर में इंजीनियरिंग में डिप्‍लोमा या डिग्री रखने वाले व्‍यक्ति शामिल हैं, कई डिग्री धारक नियुक्ति के बाद योग्‍यता प्राप्‍त कर चुके हैं। एसएई पहली पदोन्‍नति एक सहायक अभियंता के रूप में होती है, जिसके बाद एक एसएई मुख्‍य अभियंता के पद तक लगातार पदोन्‍नति के लिए इच्‍छुक हो सकता है। एई इंजीनियरिंग सेवा संवर्ग में प्रवेश स्‍तर का पद है।
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