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THE_GOLU_001
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भगवान ने सबसे पहले खूबसूरत हरी-भरी धरती बनाई। धरती पर घास के हरे मैदान और हरे-भरे पेड़ बनाए। भगवान ने पशु-पक्षी भी बनाए। अन्ततः उसने अपने इस सुंदर सृजन की देखभाल के लिए मनुष्य को बनाया। साथ ही ईश्वरर ने मनुष्य को चेतावनी देते हुए कहा, तुम हमेशा धरती की हरियाली एवं उसकी खूबसूरती को सुरक्षित रखना। ठीक उसी तरह, जिस तरह मैंने इसे बनाया है। कभी कोई पाप-कर्म नहीं करना, जिससे कि धरती अपनी सुंदरता खो बैठे। यह चेतावनी देने के बाद भगवान ने मनुष्य को धरती पर भेजा। लेकिन जल्दी ही मनुष्य भगवान की चेतावनी को भूल गया। उसने चोरी, हत्या, झूठ बोलना, पेड़ों को काटना जैसे पाप-कर्म करने शुरू कर दिए। इस वजह से धरती की सुंदरता खो गई और वह मरुस्थल में परिवर्तित हो गई। अब मनुष्य अपने किए पर पछता रहा था। तब उसने भगवान से माफी मांगी। फिर भगवान ने उसे क्षमा कर दिया।