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AkhilDubey
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अभियोजन का मामला संक्षेप में इस प्रकार है कि फरियादी ने थाना पर जाकर इस आशय की मौखिक प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करवाई है कि घटना दिनांक की थी तू मेरे लड़के के साथ मजूदरी क्यों गई थी और बदनाम करती है। इसी बात को लेकर उसका लड़का जो अलग रहता है उसके पास आया और उसे गालियां देने लगा, गालियां देने से मना किया तो थप्पड़ घुसे से मारा व कुल्हाड़ी का डण्डे से मारा जो उसे मुंह, पीठ, कमर व दोनों पैरों व सिर में चोट लगी और कहा कि अगर ज्यादा बोली तो जान से खत्म कर दूंगा। घटना उसका छोटे भाई ने देखी। उक्त रिपोर्ट के आधार पर अभियुक्त के विरूद्ध पुलिस थाना के अपराध क्रमांक अंतर्गत धारा-294, 323, 506 भाग-2 भारतीय दण्ड संहिता के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया और संपूर्ण विवेचना उपरांत यह अभियोग पत्र विचारण हेतु न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। अभियुक्त को मेरे द्वारा निर्णय की कंडिका 01 में वर्णित आरोप पत्र निर्मित कर पढ़कर सुनाये, समझाये जाने पर अभियुक्त के द्वारा उक्त धाराओं में अपराध करना अस्वीकार करते हुए विचारण चाहा, उसका अभिवाक् उसी के शब्दों में अंकित किया गया। अभियोजन की ओर से प्रस्तुत की गई साक्ष्य के आधार पर आरोपी के विरूद्ध कोई साक्ष्य नहीं आने से अभियुक्त का अभियुक्त परीक्षण नहीं लिया गया है। दिनांक को फरियादी एवं आरोपी के बीच धारा-323, 506 भाग-2 भारतीय दण्ड संहिता में राजीनामा हो जाने के आरोपी को धारा-323, 506 भाग-2 भारतीय दण्ड संहिता में दोषमुक्त किया गया हैं एवं धारा- 294 भारतीय दण्ड संहिता शमनीय योग्य नहीं होने से उसका विचारण जारी रहा है। फरियादी साक्षी आरोपी संख्या-01 व साक्षी आरोपी संख्या-02 ने अपने न्यायालयीन कथन में बताया है कि वह आरोपी का जानते हैं। घटना दिनांक को आरोपी से उसकी बोलचाल हो गई थी। जिसकी रिपोर्ट पुलिस थाना पर दर्ज करवाई है।