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AkhilDubey


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कभी (धारा 117 के अधीन किसी कार्यपालक मजिस्‍ट्रेट द्वारा पारित किसी आदेश के मामले में जिला मजिस्‍ट्रेट या किसी अन्‍य मामले में मुख्‍य न्‍यायिक मजिस्‍ट्रेट) की यह राय है कि कोई व्‍यक्ति जो इस अध्‍याय के अधीन प्रतिभूति देने में असफल रहने के कारण कारावासित है, समाज या किसी अन्‍य व्‍यक्ति को परिसंकट में डाले बिना छोड़ा जा सकता है तब वह ऐसे व्‍यक्ति के उन्‍मोचित किए जाने का आदेश दे सकता है। जब कभी कोई व्‍यक्ति इस अध्‍याय के अधीन प्रतिभूति देने में असफल रहने के कारण कारावासित किया गया हो तब उच्‍च न्‍यायालय या सेशन न्‍यायालय या जहां आदेश किसी अन्‍य न्‍यायालय द्वारा किया गया है, वहां (धारा 117 के अधीन किसी कार्यपालक मजिस्‍ट्रेट द्वारा पारित किसी आदेश के मामले में जिला मजिस्‍ट्रेट या किसी अन्‍य मामले में मुख्‍य न्‍यायिक मजिस्‍ट्रेट) प्रतिभूति की रकम को या प्रतिभुओं की संख्‍या को या उस समय को, जिसके लिए प्रतिभूति की अपेक्षा की गई है, कम करते हुए आदेश दे सकता है। उपधारा (1) के अधीन आदेश ऐसे व्‍यक्ति का उन्‍मोचन या तो शर्तों के बिना या ऐसी शर्तों पर, जिन्‍हें वह व्‍यक्ति स्‍वीकार करे, निर्दिष्‍ट कर सकता है। परंतु अधिरोपित की गई कोई शर्त उस अवधि की समाप्ति पर, प्रवृत्‍त रहेगी जिसके लिए प्रतिभूति देने का आदेश दिया गया है। राज्‍य सरकार उन शर्तों को विहित कर सकती है, जिन पर सशर्त उन्‍मोचन किया जा सकता है। यदि कोई शर्त, जिस पर ऐसा कोई व्‍यक्ति उन्‍मोचित किया गया है, (धारा 117 के अधीन किसी कार्यपालक मजिस्‍ट्रेट द्वारा पारित किसी आदेश के मामले में जिला मजिस्‍ट्रेट या किसी अन्‍य मामले में मुख्‍य न्‍यायिक मजिस्‍ट्रेट) की राय में, जिसने उन्‍मोचन का आदेश दिया था या उसके उत्‍तरवर्ती की राय में पूरी नहीं की गई है, तो वह उस आदेश को रद्द कर सकता है।
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