words per minute

13

AkhilDubey


00:00

Speed

हकि, वादपत्र की कलम नम्‍बर 07 लिेखे मुताबिक गलत है स्‍वीकार नहीं। वादोक्‍त भूमि पैतृक भूमि होने एवं पिता को बेचने की कोई आवश्‍कयता अधिकार होने का तथ्‍य गलत लिखा गया है। वादिया का कोई हिस्‍सा विवादित आराजी में नहीं है। उक्‍त विक्रय पत्र वादिया के पिता के द्वारा स्‍वेच्‍छा पूर्वक किया गया है एवं उन्‍होंने बयनामा की आवश्‍यकता अपने घरू खर्च एवं दिगर कार्य की पूर्ति के लिए करना बतायी थी। इस आधार पर उपपंजीयक के द्वारा उनसे पूछताछ करने के पश्‍चात बयनामा का पंजीयन किया गया है। बयनामा की जानकारी वादिया के पिता को होने का तथ्‍य भी गलत एवं निराधार लिखाया गया है। वादिया के पिता के द्वारा स्‍वस्‍थ चित्‍त अवस्‍था में बयनामा किया गया है। उक्‍त विक्रय पत्र तो नुमाइशी है और ही वादिया को उक्‍त बयनामा को चुनौती देने का कोई अधिकार है। विवादित आराजी वादिया का कोई स्‍वत्‍व भी निहित नहीं है। वादिया ने यह भी गलत लिखा है कि वादिया के पिता मरणासन्‍न स्थिति में होकर कुछ भी करने की स्थिति में नहीं है, ही वह उठ सकते हैं और ही बैठ सकते हैं, ही उनके मुंह से आवाज निकलती है। उक्‍त समस्‍त तथ्‍य कपोल-कल्पित लिखे गये हैं। वादिया के द्वारा यह भी तथ्‍य गलत लिखाया है कि यदि प्रतिवादी उसके पति के विरूद्ध कार्यवाही नहीं हुई तो वादिया को अपूर्तिनीय क्षति होगी एवं यह भी गलत लिखा है कि जिसकी पूर्ति किसी भी प्रकार हर्जे-खर्चे से होना सम्‍भव नहीं है बल्कि प्रतिवादी क्रमांक 01 के द्वारा 28 लाख 98 हजार रुपये प्रतिफल की राशि अदा करने के पश्‍चात बयनामा निष्‍पादन कराया गया है। इस कारण वादिया के मुकाबले प्रतिवादी को ही अपूर्तिनीय क्षति होगी। पूर्व में भी वादिया अपने पिता की ओर से उक्‍त भूमि पर काबिज कास्‍त होकर खेती करवाती है।
words per minute
0
wpm
accuracy
0%
Text Practice - Time 375 - English

words per minute