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शुक्रवार को ब्यावरा न्यायालय में विचाराधीन एक मामले में जेएमएफसी अजय नील करोठिया ने झूठी एफआईआर दर्ज कराने और कोर्ट में झूठा बयान देने वाले दो आरोपियों को दण्डित किया गया है। कोर्ट ने विनोद पिता कन्हैयालाल शाक्य निवासी तुलसी नगर, ब्यावरा और राजेन्द्र पिता बिहारीलाल सोनी निवासी राजगढ़ रोड ब्यावरा को एक-एक साल की कैद के साथ ही एक-एक हजार के जुर्माने की सजा सुनाई है। जानकारी के अनुसार ब्यावरा न्यायालय में यह अपनी तरह का यह पहला ऐसा मामला है, जिसमें रिपोर्टकर्ता को कोर्ट में झूठा बयान देने पर सजा सुनाई है। शासन की ओर से पैरवी कर रही एडीपीओ नीरज भार्गव बताया कि आरोपियों द्वारा वर्ष 2008 में जमीन विवाद में फरियादी बनकर धारा 420 आईपीसी और 10 एससी, एसटी एक्ट के तहत व्याबरा थाने में प्रकरण दर्ज कराया था। इस मामले में विशेष न्यायाधीश अत्याचार अधिनियम, राजगढ़ फरियादी बने और पूरे मामले की जांच में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस जांच के उपरांत उक्त मामला सही नहीं पाया गया। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ने द्वारा लूट के मामले में दो आरोपियों को एक-एक वर्ष की सजा सुनाई है। अभियोजन के अनुसार 16 मई 2007 की रात 10:30 बजे गगन, प्रदीप व समीर भवानी मण्डी से भानपुरा आ रहे थे तभी रास्ते में नाले के पास तूफानसिंह पिता भंवरसिंह सौंधिया राजपूत व शंभूसिंह पिता बालूसिंह सौंधिया राजपूत निवासी रेटडी ने उनके साथ लूट की थी। गगन की रिपोर्ट पर भानपुरा पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार किया और अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। न्यायाधीश ने अभियोजन के तर्कों से सहमत होते हुए आरोपी तूफानसिंह पिता भंवरसिंह सौंधिया राजपूत व शंभूसिंह पिता बालूसिंह सौंधिया राजपूत निवासी रेटडी को 1-1 वर्ष का कारावास व 500-500 रू अर्थदण्ड से दण्डित किया है। प्रकरण में पैरवी एडीपीओ नरेंद्र कुमार सांगते ने की। नाबालिग का अपहरण करने वाले आरोपी को कोर्ट ने एक साल कारावास की सजा सुनाई।