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Deepak_Shakya


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िसी अन्‍य के शील पर लांछन लगाना मानहानि नहीं है परंतु यह तब तक जबकि उसे लगाने वाले व्‍यक्ति के या किसी अन्‍य व्‍यक्ति के हित की संरक्षा के लिए या लोक कल्‍याण के लिए, वह लांछन सद्भावपूर्ण लगाया गया हो। नवें अपवाद के अनिवार्य तत्‍व इस प्रकार हैं- प्रथमत: लांछन सद्भावपूर्ण लगाया जाना चाहिए, द्वितीयत: लांछन उसे लगाने वाले व्‍यक्ति के या किसी अन्‍य व्‍यक्ति के हित की संरक्षा के लिए या लोक कल्‍याण के लिए लगाया जाना चाहिए। सद्भाव तथ्‍य का प्रश्‍न है और यही बात लांछन लगाने वाले व्‍यक्ति के हित की संरक्षा के संबंध में लागू होती है। लोक कल्‍याण भी तथ्‍य विषयक प्रश्‍न है। हरभजन सिंह बनाम पंजाब राज्‍य वाले मामले में उच्‍चतम न्‍यायालय ने भारतीय दंड संहिता की धारा 499 के नवें अपवाद पर विचार करते समय यह मताभिव्‍यक्ति की कि हमें इस बाबत निष्‍कर्ष निकालना होगा कि क्‍या किसी व्‍यक्ति के सम्‍यक् सतर्कता और ध्‍यान के साथ कृत्‍य किया। न्‍यायालय ने यह मत व्‍यक्‍त किया कि कोरा विश्‍वास अथवा वास्‍तविक विश्‍वास अपने आप में काफी नहीं है। अपीलार्थी को यह बात सिद्ध करना होगा कि उसके आक्षेपित कथन में के विश्‍वास का तर्कयुक्‍त आधार था और वह अंधविश्‍वास मात्र नहीं था। जहां सम्‍यक् सतर्कता और ध्‍यान की महत्‍वपूर्ण भूमिका होती है वहां सद्भावपूर्वक कृत्‍य करने का अभिकथन करने वाले व्‍यक्ति को किसी तथ्‍य के रूप में यह बात सिद्ध करनी होगी कि उसने लांछन लगाने से पूर्व जांच कर ली थी और उसे यह उपदर्शित करने के लिए कारण और तथ्‍य बताने होंगे कि उसने सम्‍यक् सतर्कता और ध्‍यान से कृत्‍य किया था और इस बाबत अपना समाधान कर लिाय था कि लांछन सही था। कथनके सत्‍य होने का सबूत नवें अपवाद उसी प्रकार अनिवार्य तत्‍व नहीं है जिस प्रकार वह धारा 499 के पहले अपवाद का अनिवार्य तत्‍व है। जहां तक नवें अपवाद का संबंध है, लांछन लगाने वाले व्‍यक्ति को यह सिद्ध करना होता है कि उसने सम्‍यक् सतर्कमा और ध्‍यान के साथ जांच की थी और इस प्रकार उसका इस बाबत समाधान हो गया था कि लांछन सत्‍य है।
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