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THE_GOLU_001
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गीत अगीत और सुंदर है, यह प्रसिद्ध गीत की एक पंक्ति है। गीत का अर्थ है, जहां भावनाएं सृजनात्मक धरातल पर मूर्त आकार ले चुकी होती हैं और अगीत जहां भावनाएं, संवेदनाएं अंतर्मन तक ही सीमित रहकर अभिव्यक्ति तक नहीं पहुंच पाती हैं। लेखक और पाठक में यही अंतर होता है। अनुभूतियां और संवेदनाएं दोनों में समान होती हैं लेकिन एक उन्हें अभिव्यक्त करने की क्षमता रखता है जबकि दूसरा इस दृष्टि से अक्षम रहता है। हमारे आस-पास का परिवेश निरंतर परिवर्तित होता रहता है। लेखक, चूंकि सामाजिक प्राणी है, अतः उस पर इन सबका प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है। मनुष्य का विशिष्ट गुण होता है- संवेदना यानि दूसरों के दुःख पीड़ा में भावात्मक रुप से सहयोगी होना। यही गुण उसे मानव समाज से रचनात्मक धरातल पर जोड़ता है। लेखक अपने लेखन में जो कुछ अभिव्यक्त करता है, उस सबको व्यावहारिक रुप से अपने जीवन में नहीं भोगता क्योंकि छोटे से जीवन में हम सब कुछ अनुभव नहीं कर सकते। संवेदनात्मक धरातल पर ही उसका अनुभव संसार विशाल होता जाता है। कहते हैं लेखक में सृजनात्मकता के बीज जन्मजात होते हैं। अभ्यास के द्वारा वह उसे पल्लवित कर सकता है। धन्यवाद दोस्तो आप ऐसे ही जोर शोर से टाईपिंग करते रहें यही मेरी मनोकामना है। मंजीत-