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abhishek74
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सर्दियों के दिन थे। एक बालक सुबह के समय अकेला स्कूल जा रहा था। रास्ते में एक स्टेशन था। वह रेल की पटरी के पास से गुजर रहा था कि अचानक उसकी नज़र रेल की पटरी पर गई। वह उखड़ी हुई थी। बालक ने घड़ी देखी, गाड़ी आने वाली थी। उसने सोचा कि अगर गाड़ी इस पटरी पर से गुजरेगी तो इसका भयंकर परिणाम हो सकता है। अभी वह इससे आगे सोच भी न पाया था कि गाड़ी की सीटी सुनाई दी। बस फिर क्या था, बालक के सामने एक क ही लक्ष्य था- मुसाफिरों की जान बचाना। देखते-ही-देखते इंजन दिखाई देने लगा। बालक कूदकर दोंनों पटरियों के बाच खड़ा होकर अपनी कमीज हिलाने लगा। ड्राइवर की नजर उस बालक पर पड़ गई और उसने ब्रेक लगा। दी, लेकिन गाड़ी बिलकुल बालक के पास आकर रुकी। ड्राइवर ने क्रोध से पूछा ‘क्या तुम्हें अपनी जान की कोई परवाह नहीं गाड़ी क्यों रोकी’ बालक ने रेल की उखड़ी हुई पटरी दिखाई और कहा, “अगर मैं ऐसा न करता तो सैकड़ों लोगों की जान चली जाती” उसके बाद ड्राईवर नें उस बच्चे का शुक्रीया किया और सरकार से इनाम देने की घोषणा करते हुए उसका नाम मंत्रालय में पहुँचाया गया। तभी वहाँ पर उस बच्चे के माता पिता आ जातें हैं स्थिति को देख कर वो दंग रह जातें हैं। पुछने पर उन्हें बताया गया कि आपके बच्चे नें आज एक दुर्घटना को टाल दिया। आपका और आपके बच्चे का धन्यवाद करतें हैं।