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rakesh_chaturvedi
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सभापति महोदय, आपके माध्यम से मैं राजभाषा समिति से प्रार्थना करूॅगा कि वह अपनी अन्तरिम रिपोर्ट सरकार को दे, दे ताकि इस संबंध में जो ढील है वह दूर हो । आज संसार के लगभग एक सौ विश्वविद्यालयों में हिन्दी पढ़ाई जा रही है। दूसरी ओर हमारे देश में हिन्दी या क्षेत्रिय भाषा नहीं पढ़ाई जाती है। भारत सरकार की निति के अनुसार भारतीय भाषा शिक्षा का माध्यम होनी चाहिए लेकिन कहीं भी भारतीय भाषा माध्यम नहीं हो पाई है। हमें इस बात का प्रयत्न करना चाहिए कि वह शिक्षा का माध्यम बने। इस संबंध एक-एक करोड़ रूपया केन्द्र सरकार ने प्रत्येक राज्य सरकार को दिया है जिससे हिन्दी का अच्छा प्रचार हो सके और साथ ही अन्य भारतीय भाषाओं का भी विस्तार हो सके। लेकिन लगता यह है कि उसकी गति बिल्कुल धीमी हो गई है। इसकी भी जांच-पड़ताल होनी चाहिए। हमें इस बात का पता लगाना चाहिए की यदि गति नहीं आई तो क्याें नहीं आई और संबंध में क्या व्यवस्था की जानी चाहिए।
सभापति महोदय, संयुक्त राष्ट्र संघ की भाषा हिन्दी भी होनी चाहिए। यह मांग बराबर उठ रही है। किन्तु होगी या नहीं और कब होगी यह दूर की बात है। अभी हमारे देश में तटस्थ राष्ट्रों का सम्मेलन हो रहा है। मैं समझता हूँ कि भारत की भूमि पर कितना बड़ा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन पहले कभी नहीं हुआ था। इसका श्रेय वर्तमान सरकार को और हमारे प्रधानमंत्री को है लेकिन मैंने सुना है कि वह भी हिन्दी भाषा का प्रयोग नहीं होगा। केवल चार भाषाओं की व्यवस्था की गई है। यदि यह सूचना गलत है तो बहुत अच्छी बात है। हिन्दी की व्यवस्था आवश्य होनी चाहिए यदि ऐसी व्यवस्था नहीं हुई तो जो प्रतिनिधि बाहर से आ रहे हैं वे क्या सोचेगें जिस देश की अपनी भाषा नहीं होगी उसकी क्या उन्नति हो सकती है।