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्रत्‍यर्थीगण की ओर से विद्वान अधिवक्‍ता द्वारा मौखिक तर्क के दौरान निम्‍नलिखित न्‍यायिक दृष्‍टान्‍त प्रस्‍तुत किए गए- डॉ राजेश अन्‍य बनाम अन्‍य, रिवीजन पिटीशन निर्णय दिनांक के मामले में मा. राष्ट्रिय आयोग ने माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय द्वारा के मामले में दिए गये निर्णय का सन्‍दर्भ दिया जिसमें माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने कहा कि यदि एक बार यह कथन किया जाता है कि रोगी किसी विशेष हास्पिटल में भर्ती किया गया और यह साक्ष्‍य दिया जाता है कि वह उचित देखभाल के अभाव में मृत्‍य को प्राप्‍त हुआ तब यह सिद्ध करने का भार हास्पिटल पर होगा कि हास्पिटल या डॉ के द्वारा किसी प्रकार की कोई उपेक्षा नहीं की गई ऐसे किसी भी मामले में हास्पिटल एक अच्‍छी स्थिति में होता है, इस तथ्‍य को बताने के लिये क्‍या सावधानियॉं ली गई और किन दवाईयों को दिया गया। यह हास्पिटल का कर्तव्‍य है कि वह सन्‍तुष्टि करे कि उसके द्वारा तो कोई उपेक्षा बरती गई और लापरवाही की गई। हास्पिटल एक संस्‍थान है जिसमें आम व्‍यक्ति पहुँचता है और रोगी सेवा की अपेक्षा करता है। यदि हास्पिटल अपने कर्तव्‍यों को निभाने में अपने रखे डॉक्‍टर द्वारा असफल रहता है तब यह सिद्ध करना हास्पिटल का कर्तय है और दलील में एक विशेष डॉक्‍टर की दलील से हास्पिटल का दायित्‍व कम नहीं होता। सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने कहा कि उपचार किए गये डॉक्‍टर को पक्षकार नहीं बनाने से मूल याचिका निरस्‍त नहीं होगी। उपभोक्‍ता आयोग का प्रारम्भिक दायित्‍व उपभोक्‍ताओं के हितों की सुरक्षा को अच्‍छी तरह से देना है, कि उनके दावों को तकनीकी आधार पर निरस्‍त करना। रोगी या उसके परिवार के सदस्‍यों के ऊपर बहुत ज्‍यादा दबाव नही देना चाहिए कि वेे सभी डॉक्‍टरों को पक्षकार बनाऐं जिन्‍होंने रोगी की चिकित्‍सा की। सर्वप्रथम उपरोक्‍त विधि व्‍यवस्‍था के तथ्‍य इस प्रकरण से तथ्‍यों से भिन्‍न हैं, क्‍योंकि उपरोक्‍त विधि व्‍यवस्‍था में यह माना गया है कि हत्‍या दुर्घटना की श्रेणी में ही मानी जानी चाहिये, जबकि हत्‍या का कारण स्‍वंय बीमाधारक का कोई जानबूझकर किया हुआ कार्य ही कारण रहा हो। इस प्रकरण में हत्‍या का कारण रूपये के लेन-देन के सम्‍बन्‍ध में मृतक को अभियुक्‍तों द्वारा जान से मारने की नियत से अपहरण किये जाने का तथ्‍य प्रथम सूचना रिर्पोट में अंकित कराया गया है। अत: केवल हत्‍या की नियत से अपहरण किये जाने का तथ्‍य अंकित है, अपितु रूपये के लेन-देन के सम्‍बन्‍ध में हत्‍या का कारण भी दृष्टिगत होता है। इस सम्‍बन्‍ध में अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्‍ता द्वारा माननीय उच्‍चतम न्‍यायालय द्वारा दिये गये निर्णय का हवाला दिया गया है।
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