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प्रार्थी के विद्वान अधिवक्ता का कथन है कि उब्त पोर्टल का संचालक सुशील पंडित पुत्र ब्रहमेश्वर निवासी थाना- बीटा है जिससे प्रार्थी का कोई लेना देना कभी भी पूर्व मे नहीं रहा। प्रार्थी के विद्वान अधिवक्ता ने न्यायालय का ध्यान इस ओर आकर्षित किया जो गैंग के बारे में प्रथम सूचना रिपोर्ट में व्याख्या की गई है उसका नेतृत्व को करना बताया गया है। प्रार्थी के विद्वान अधिवक्ता द्वारा न्यायालय का इस ओर आकर्षित किया कि प्रथम सूचना रिपोर्ट में दर्ज निम्न विवरण स्वयं में विचारणीय है। प्रार्थी के विद्वान अधिवक्ता द्वारा न्यायालय का ध्यान इस बात की ओर भी आकर्षित किया गया कि प्रस्तुत जमानत प्रार्थनापत्र उच्च न्यायालय के सम्मुख दिनांक को प्रस्तुत किया गया जिसका नोटिस शासकीय अधिवक्ता उच्च न्यायालय के कार्यालय को दिनांक को दिया गया था। तत्पश्चात दिनांक को जमानत प्रार्थनापत्र न्यायालय के सम्मुख प्रस्तुत हुआ जिसे न्यायालय द्वारा के लिए स्थगित किया गया। दिनांक को विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता द्वारा दाखिल प्रति शपथपत्र का अवलोकन किया गया एवं अपर शासकीय अधिवक्ता के कथन को दृष्टिगत रखते हुए यह तथ्य अपने आदेश में सम्मिलित किया गया कि इनवेस्टिगेशन कार्यवाही सुचारू रूप से चल रही है व प्रथम सुचना रिपोर्ट में उल्लिखित तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए विभिन्न माध्यमों की आडियो रिकार्डिंग व वीडियो का परीक्षण किया जा रहा है। उक्त ऊपर लिखित विवरण जो कि प्रथम सूचना रिपोर्ट का अंग है से यह विदित होता है कि कुछ दृष्टान्तों जिनका विवरण आगे प्रथम सूचना रिपोर्ट में है। परन्तु जो प्रार्थी चन्दन राय से सम्बन्धित नहीं है में यह माना गया कि कुछ अधिकारी आर्थिक लाभ अर्जित करने हेतु वेब न्यूज पोर्टल के संचालकों के साथ मिले हुए थे। उक्त दृष्टान्त को कदापि अन्यथा न किया जावे जो कि वस्तुत: प्रथम सूचना रिपोर्ट का अंग है। सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विशेष अधिवक्ता शासकीय अधिवक्ता श्री शिव कुमार पाल व अपर शासकीय अधिवक्ता उपस्थित हुए एवं उनके द्वारा अपना पक्ष रखा गया। विपक्षी के विद्वान वरिष्ठ अधिवक्ता द्वारा अन्त में यह कहा गया कि समाज के हित में प्रार्थी का जेल से बाहर आना कदापि उचित नहीं है। मेरे द्वारा प्रार्थी के विद्वान अधिवक्ता को विस्तृत रूप से सुना गया। प्रथम सूचना रिपोर्ट के अवलोकन से यह दृष्टिगत होता है कि यद्यपि प्रार्थी का संचालन किया गया है परन्तु जिन तथ्यों का विवरण प्रथम सूचना रिपोर्ट में प्रार्थी से सम्बन्धित दिया गया है उनसे प्रथम दृष्टया यह कदामि साबित नहीं होता है कि प्रार्थी द्वारा किसी प्रकार का कोई प्रलोथन किसी पुलिस के अधिकारी अथवा पुलिस के कर्मचारी को इस ध्येय से दिया गया।