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Ashish_Raikwar


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्रतिवादीगण की ओर से पृथक से लिखित जवाब प्रस्‍तुत कर उपरोक्‍तानुसार रहे अविवादित तथ्‍यों के अलावा वादीगण के शेष समस्‍त तात्विक अभिवचनों से विनिर्दिष्‍टतया इंकार करते हुए , अतिरिक्‍त रूप से अभिवचनित किया है कि स्‍वर्गीय रामदास ने अपने जीवनकाल में ही अपने पुत्र राजेश एवं जीवनलाल के बीच विधिवत बंटवारा कर दिया था और बंटवारे में जो जमीन राजेश को दी गई थी वह उसके नाम पर दर्ज हुए और वर्तमान में प्रतिवादी का नाम दर्ज है। इसी प्रकार जीवनलाल को भी जमीन बंटवारा में दी गई थी वह जमीन जीवनलाल के नाम दर्ज हुई थी और उनकी मृत्‍यु के बाद वारिसाना हक के आधार पर प्रतिवादीगण के नाम दर्ज है तथा वादित जमीन राजस्‍व रिकार्ड में प्रतिवादी के नाम पर भूमि स्‍वामी की हैसियत से दर्ज है और वे ही उस पर काबिज है, जिस पर वादीगण का अधिकार नहीं है। वाद पत्र के अनुतोष की कंडिका में राजस्‍व न्‍यायालय की कार्यवाही हो स्‍थाई रूप से रोके जाने हेतु दावा पेश किया है, जबकि राजस्‍व न्‍यायालय की कार्यवाही को स्‍थाई रूप से रोके जाने हेतु क्षेत्राधिकार न्‍यायालय को नहीं है। वादीगण ने यह भी स्‍पष्‍ट नहीं किया कि तहससीलदार के यहा बंटवारा हेतु जो प्रकरण लंबित है जिस प्रकार की कार्यवाही स्‍थगित किये जाने हेतु आवेदन पेश किया गया है उसका प्रकरण क्रमांक क्‍या है। अत: वादीगण द्वारा प्रस्‍तुत अपील निरस्‍त किये जाने की आपत्ति अभिवचन किया है। विचारण न्‍यायालय ने प्रथम द्ष्‍टया मामला, सुविधा का संतुलन एवं अपूर्णनीय क्षति का बिंदू अपीलार्थीगण के पक्ष में मानकर त्रुटि की है तथा प्रत्‍यर्क्षीगण ने जवाबदावा में स्‍वीकार किया है कि प्रत्‍यक्षीगण ने बंटवारा हेतु आवेदन पत्र तहसीलदार के यहां पेश किया है तथा प्रत्‍यक्षीगण के नाम से अधिक भूमि क्‍यों दर्ज है इस बात का कोई स्‍पष्‍टीकरण प्रत्‍यर्क्षीगण द्वारा नहीं दिया गया है तथा प्रत्‍यर्क्षीगण द्वारा इस बात का प्रमाण नहीं दिया है कि उनके स्‍वामित्‍व में अधिक जमीन किस प्रकार दर्ज हो गई हे। अपीलार्थीगण द्वारा भूमियों के जो दस्‍तावेज प्रस्‍तुत किये गये है एवं जो खसरा नंबर दर्शित है उन्‍हें प्रत्‍यर्क्षीगण द्वारा स्‍पष्‍ट रूप से इंकार भी नहीं किया गया है।
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