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arpit_shah
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संस्कृत साहित्य की एक महत्त्वपूर्ण विधा है क्या साहित्य या आख्यान साहित्य। लोगों को धर्म, नीति आदि का जान देने के लिए इस विधा का विकास हुआ। कथा साहित्य के दो भाग है- नीति कया तथा लोक कया। नीति कथाएं उपदेशात्मक होती हैं. ये पशु-पक्षियों पर आधारित होती हैं। इसके विपरीत सोकक्याएं केवल मनोरंजन को दृष्टि में रख कर लिखी जाती है. इनके पात्र मनग्य होते हैं।
पंचतन्त्र नीतिकथा साहित्य का एक प्राचीन एवं महत्त्वपूर्ण गन्य है। इसकी रचना तीसरी शताब्दी के पूर्व की गयी थी, इसके लेखक पं. विष्णु शर्मा हैं। यह ग्रन्थ सामान्य जनों के उपयोग को ध्यान में रख कर लिखा गया था। यह ग्रन्य विश्व में अत्यधिक लोकप्रिय हुआ।
दक्षिण भारत के महिलारोग्य नामक नगर के राजा अमरकीर्ति के तीन पुत्र थे जो महामूर्य व शास्वविमुख ये। इन्हें विद्या सिखाने के लिए एक योग्य गुरु की आवश्यकता पड़ी। अनेक विद्वान आए और उन्होंने उन राजकुमारों को शिक्षित करने व ज्ञान देने का बड़ा प्रयत्न किया पर असफल रहे। तव विष्णु शर्मा ने उन्हें जानसम्पन्न, कुशल, सदाचारी व नीतिज बनाने का बीड़ा उठाया और पशु-पक्षियों पर आधारित कयाओं के माध्यम से उन्हें शिक्षित किया, इन्हीं क्याओं का संकलन पंचतन्त्र के नाम से प्रसिद्ध हआ। इस ग्रन्थ की उपादेयता को दृष्टि में रख कर स्वयं कवि ने कहा
"अपीते च इदं नित्यं नीतिशास्त्र शणोति च, न पराभवमाप्नोति शक्रादपि कदाचन।'
पांच तन्व
पंचतन्त्र के पांच तन्त्र या पांच भाग है- मित्रभेद. मित्रसम्प्राप्ति, काकोलूकीय, लब्धप्रणाश एवं अपरीक्षितकारका तन्त्र का अर्थ है नीतियुक्त शासनविधि। पंचतन्त्र एक ऐसा ग्रन्य है जिसमें नीतियुक्त शासनविधि के पांच तन्न (गुर) बतलाए गए हैं। पंचतन्त्र की विशेषता यह है कि इसकी प्रत्येक कथा शिक्षाप्रद है. इसकी कहानियां एक दूसरे के साथ कड़ी से जुड़ी हुई हैं। प्रत्येक तन्त्र की मुख्य कया तो एक ही है किन्तु उसे सबल बनाने के लिए इसके साथ कई अवान्तर कथाएं चलती हैं। कथानक का वर्णन गद्य में है किन्तु उपदेशात्मक सूक्तियां पद्य में हैं, यथा- 'बुभुक्षितः किं न करोति पापम्'....., 'वरं बुद्धिर्न सा विदया'. 'न विश्वसेदविश्वस्त .... इत्यादि