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MohitGupta11711843
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छत्तीसगढ़ की बिलासपुर हाई कोर्ट ने शादी के 30 वर्ष बाद पत्नी के चरित्र पर शंका व क्रूरता का आरोप लगा तलाक के लिए प्रस्तुत अपील को खारिज किया है. कोर्ट ने कहा कि पति-पत्नी एक दूसरे का सम्मान करें. दरअसल याचिकाकर्ता छत्तीसगढ़ निवासी की अक्टूबर 1988 को शादी हुई थी। 1993 में एक बच्चे का जन्म हुआ। शादी के 28 वर्ष बाद पति ने पत्नी के चरित्र पर आरोप लगाते हुए तलाक के लिए परिवार न्यायालय में परिवाद पेश किया। परिवाद में कहा गया कि वह अप्रैल 1992 को एक दिन घर आया और कॉल बेल बजाया, लेकिन पत्नी ने दरवाजा नहीं खोला। याचिका में पति की ओर से बताया गया कि पति द्वारा खटखटाने के बाद दरवाजा खोला तो मेरी पत्नी ने जल्दी दरवाजा नहीं खोला वह मुझसे बात भी नहीं करती है और वह समय पर मुझे खाना भी नहीं देती है। पत्नी की इस क्रूरता के आधार पर तलाक दिलाये जाने की मांग पति की ओर से की गई। पति द्वारा लगाए गए आरोप पर कोई साक्ष्य नहीं होने पर परिवार न्यायालय ने परिवाद को खारिज कर दिया था। परिवार न्यायालय से परिवाद खारिज होने के बाद पति ने हाई कोर्ट की शरण ली। पेश नहीं कर पाया कोई ठोस साक्ष्य पति ने हाई कोर्ट बिलासपुर में तलाक के लिए अपील पेश की। हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पाया कि पति ने पत्नी पर निराधार आरोप लगाया है। कोई ठोस साक्ष्य नहीं है। पति ने अपनी पत्नी पर जितने भी आरोप लगाए, उसे कोर्ट में वह साबित नहीं कर पाया। इसके बाद हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पति-पत्नी को हमेशा एक दूसरे का सम्मान करना चाहिये। कोर्ट ने परिवार न्यायालय के आदेश पर हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए अपील को खारिज किया।