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चुनावी आशंकाओं के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनों ने विवाद से बचते हुए लखीमपुर खीरी में प्रचार सभाएं टाल दीं। प्रधानमंत्री ने समीपवर्ती हरदोई जिले का रुख किया। मुख्यमंत्री ने लखीमपुर शहर से मात्र 20 किलोमीटर दूर परधान कस्बे में श्रीनगर विधानसभा के मतदाताओं को संबोधित किया। लखीमपुर और हरदोई में प्रधानमंत्री की प्रचार सभा की खबर कुछ दिन पहले स्थानीय समाचार पत्रों ने छापी थी। उनकी सभा टलने की खबर आज नहीं छपी। चर्चा जरूर थी कि उनके स्थानीय पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आएंगे लेकिन योगी बाबा शहर से दूर रहे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ चलने वाले सुरक्षाकर्मियों और अन्यो अधिकारियों का डेरा जिला मुख्यालय में है। प्रचार समाप्त होने में सिर्फ एक दिन बाकी है। ऐसे में देश और राज्यि के दो प्रमुख नेताओं के लखीमपुर शहर से बचने पर तरह-तरह की अटकलें लगाई गई। उपमुख्यमंत्री केशवप्रसाद मौर्य भी जिले की ग्रामीण विधानसभा में प्रचार करने के बाद रवाना हो गए। पहला अंदाज यह लगाया गया कि खुफिया एजेंसियों ने प्रधानमंत्री को आगाह किया था। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी के बेटे आशीष उर्फ मोनू को किसानों पर गाड़ी चढ़ाकर कुचलने के आरोप में हिरासत में लिया गया। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पहले चरण के मतदान के दिन 10 फरवरी को उसकी जमानत हुई और 14 फरवरी को वह जेल से बाहर आया। दूसरी अटकल यह थी कि पंजाब चुनाव के लिए मतदान तिथि के कारण भाजपा किसी भी तरह के झंझट से बच रही है। चर्चा यह भी है कि गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र से कहा गया है कि वे या उनका बेटा प्रचार के लिए बाहर न निकलें। न किसी से बात करें।
खुफिया एजेंसियों वाले अंदाज की पड़ताल और पुष्टि बेकार है। सब जानते है कि कार्यक्रम पर अंतिम मुहर प्रधानमंत्री स्वयं लगाते हैं। राज्यमंत्री टेनी और उनके बेटे अब तक अपने पुश्तैनी गांव बनवीरपुर से दूरी बनाए हुए हैं, जो लखीमपूर खीरी लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत निघासन विधानसभा के अंतर्गत है। यह सही है कि दोनों अपने घर में बंद हैं। लोगों से बात करने से बच रहे हैं। राज्यमंत्री मिश्र ने रविवार शाम पहली मर्तबा लखीमपुर सदर के उम्मीदवार योगेश वर्मा के पक्ष में रोड शो किया। बेटा गायब रहा। तिकुनिया गांव में किसानों को वाहन से रौंदने का हादसा नहीं होता, तब मोनू यानी आशीष पार्टी उम्मीदवार की हैसियत से निघासन विधानसभा क्षेत्र में अपने लिए वोट मांग रहा होता।
20 फरवरी यानी रविवार को मध्य उत्तरप्रदेश और बुंदेलखण्ड के जिलों में मतदान हुआ, जहां 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने समाजवादी पार्टी और बसपा के कई किले ढहा दिए थे। उन्हें प्रतिकूल असर से बचाने के लिए भी भाजपा ने अंतिम पल में रणनीति में बदलाव किया। निघासन के निवासी राजेन्द्र तिवारी का कहना है कि भाजपा नहीं चाहती कि मोनू की जमानत पर बखेड़ा चुनावी मुद्दा बने या असंतोष पनपे।