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shubham_baxer
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दंड निर्धारण की प्रक्रिया में अपराधी के पक्ष की ओर से कोई कारक चाहे वो लघुकारी परिस्थिति हो या गंभीरता कम करने वाले बताया जाये परन्तु वो निर्णायक नहीं होगा और इसी क्रम में समय का व्यतीत हो जाना स्वयं में मजबूत कारण नहीं हो सकता है। उपयुक्त मामले में इन कारकों की भी अन्य कारकों के संग कुछ महत्ता हो सकती है। इन सब कारकों की उपस्थिति होते हुए भी अन्य कारक जैसे अपराध की प्रकृति; व उसका समाज पर होने वाला असर को अनदेखा नहीं किया जा सकता है।
उपरोक्त उल्लेखित विधिक विश्लेषण की पृष्ठभूमि में यह निर्धारित करना है कि आक्षेपित दंडादेश में पारित कारावास की अवधि व अर्थदण्ड की मात्रा को वर्तमान प्रकरण के तथ्य जैसे घटना का पूर्व में कारित होना। अपराध एक सामाजिक अपराध है तथा ऐसी स्वापक औषधियों और मन:प्रभावी पदार्थों के अवैध व्यापार का समपहरण करने के कड़े उपबन्ध करने के लिए ही अधिनियम 1985 किया गया है।