words per minute

4

royyy


00:00

Speed

होदय, देश की न्‍यायपालिका के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के चार मौजूदा वरिष्‍ठ जज मीडिया के सामने आए और कहा, सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ठीक तरह से काम नहीं कर रहा है। अगर इसे फौरन सही नहीं किया गया, तो लोकतंत्र खत्‍म हो जाएगा। सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के बाद वरिष्‍ठतम न्‍यायाधीश जस्टिस जे. चेलमेश्‍वर ने शुक्रवार को अपने आवास पर जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ के साथ मीडिया से बातचीत में कहा, किसी भी देश और कानून के इतिहास में यह बहुत बड़ा दिन और असाधारण घटना है। कुछ महीने से जो हालात हैं, उनकी वजह से हमें ये प्रेस कांफ्रेंस करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। हम चारों इस बात पर सहमत हैंं कि इस संस्‍थान को बचाया नहीं गया तो देश में लोकतंत्र जिंदा नहीं रह पाएगा। स्‍वतंत्र और निष्‍पक्ष न्‍यायपालिका अच्‍छे लोकतंत्र की निशानी है। उन्‍होंने कहा कि हमारे सभी प्रयास बेकार हो गए। यहां तक कि आज सुबह हम चारों जाकर चीफ जस्टिस से मिले, उन्‍हें मनाने की कोशिश की, लेकिन हम अपनी बात पर उन्‍हें सहमत नहीं करा सके। इसके बाद हमारे पास कोई विकल्‍प नहीं बचा कि हम देश को बताएं कि न्‍यायपालिका की देखभाल करे। जस्टिस चेलमेश्‍वर ने कहा, हम नहीं चाहते कि 20 साल बाद इस देश का कोई बुद्धिमान व्‍यक्ति ये कहे कि हमने अपनी आत्‍मा बेच दी। जजों ने सात पेज के पत्र में लिखा है कि रोस्‍टर तय करना चीफ जस्टिस का विशेषाधिकार है। परंपरा इसलिए बनाई गई ताकि कोर्ट का काम अनुशासित और प्रभावी तरीके से हो। यह परंपरा चीफ जस्टिस को अपने साथियों पर अपनी बात थोपने के लिए नहीं कहती। ऐसे कई मामले हैं जिनमें देश और संस्‍थान पर असर डालने वाले मुकदमें चीफ जस्टिस ने अपनी पसंद की बेंच को सौंपे, जिनके पीछे कोई तर्क नजर नहीं आता। हर हाल में इनकी रक्षा की जानी चाहिए
words per minute
0
wpm
accuracy
0%
Text Practice - Time 364 - English

words per minute