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jikip17155


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ाजकीय तथा सामाजिक संस्थाएं परोक्ष रूप से अपराध की दर को भावित करती है। विधि के प्रवर्तन में शिथिलता अपराध का एक कारण है यदि राजकीय संस्थानों द्वारा विधि का परचालन कठोरता से किया जाये तो अपराध की दर गिर जाती है इसके विपरीत यदि विधि के क्रियान्वयन में शिथिलता जाये तो अपराध की दर बढ़ जाती है। राजनीतिक संस्थाए निम्न प्रकार से अपराध की दर को प्रभावित करती है। राजनीतिक संस्थाए, उच्च आर्थिक स्थिति के ऐसे व्यक्तियों द्वारा प्रभावित रहती है जो अनुचित तरीको से धन कमाते है। यथा मुनाफाखोरी टेक्सों से बचाव श्रमिकों का शोषण आदि, ऐसे व्यक्ति राजनीतिक संस्थाओं की आड़ में सुरक्षित रहते है राजनीतिक संस्थाएं पुलिस पर भी प्रभाव डालती है। फलस्वरूप राजनीतिक संस्थाओं से संबंधित अपराधी कानून की पकड़ से दूर रहते हैं। अधिकांश श्वेत बंसत अपराध राजनीतिक संस्थाओं की आड़ में संभव होते हैं। ऐसे अपराधी राजनीतिक संस्थाओं की आर्थिक सहायता देते हैं और अनुचित तरीको से धन एकत्र करते हैं। फलस्वरूप धार्मिक मतभेद साम्प्रदायिक विवदो में वृद्धि करते हैं। उग्र रूप में धार्मिक मतभेद, हिसा का रूप धारण करते है फलस्वरूप अपराध की दर बढ़ती है। इसी प्रकार अनेक समाजों में ऐसे रीति रिवाज प्रचलित रहते हैं जिनमें हत्या को शौर्य का प्रतीक माना जाता उदाहरण के लिए आदिवासी समाजों में सिरोच्छेद की प्रथा प्रचलित है इस प्रकार के रीति रिवाज अपराध में वृद्धि करते है अपराध के प्रचार और प्रसार की दृष्टि से संचार में लोक अभिकरणों का विशेष स्थान है अपराध की दर को प्रभावित करने दृष्टि से इनमें निम्न उल्लेखनीय है। समाचार पत्रों में अपराध संबंधी सूचनाएं प्रकाशित होती है यथा चोरी डकैती और हत्या की घटनाए इस प्रकार की घटनाओं में अपराधी प्रकृति के लोगों में अपराध के प्रति झुकाव बढ़ता है। अपराध संबंधी सूचनाओं के प्रसार से अपराध लोगों को एक सामान्य व्यवहार की भांति प्रतीत होने लगता है।
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