words per minute
16
Varsha_Batham
00:00
Speed
अभियुक्त चेक राशि एवं न्यायालय द्वारा संगणित ब्याज और प्रतिकर राशि न्यायालय में जमा करने हेतु तत्पर था, तब माननीय न्यायालय ने व्यक्त किया है कि यदि अभियुक्त न्यायालय द्वारा संगठित प्रतिकर ब्याज रशि वितरण के दौरान जमा कर / देता है तो न्यायालय वह राशि जमा हो जाने पर धारा 258 दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत कार्यवाही रोक सकता है, जिसका परिणसाम उन्मुक्त्ि होगा। इस प्रकरण में ऐसाी स्थिति प्रकट नहीं होती है कि ब्याज राशि भी अभियुक्त ने न्यायलय द्वज्ञरा निर्णय पारित किए जाने के पश्चात् निर्णय में दिए गए निर्देशानुसार जमा की है। विचारण न्यायालय के समक्ष कार्यवाही पूर्ण् हो चुकी थी और संभव नहीं है। अत/ तथ्य भिन्न होने से यह न्यायदृष्टांत अभियुक्त को सहायक नहीं है।
इस न्यायलय द्वारा पुनरीक्षण के आधार पर लिए गए है ंकि अभियुक्त् वाहन का पंजीकृत स्वामी है ओर आवेदक वादी साक्षी उक्त वाहन का मुख्तारनामा होने के नाते संलग्न कर रहा था। आवेदक अनाज का व्यापारी है और वह अनाज ाके बाजर से क्रय कर विक्रय करने के लिए ले जा रहा था विचारण न्यायालय के समक्ष आवेदक ने अनाज की क्रय न्यायलय ने अपराध की पुनररावृत्ति के आधार पर आवेदन निरस्त करने में त्रुटि ककी है। जिस दंडाधिकारी द्वारा वाहन को राजसात करने की कार्यवाही प्रारंभ कर देने आधार पर जप्ती निवारण अधिनियम में राजसात किए जाने की कार्यवाही की सूचना मिलने पर न्यायिक दंडाधिकारी के सुपुर्दगी संबंधी अधिकार प्रभावित नहीं होते हैं। वाहन थाने में खुले में पड़ाह है, आदेश निरस्त करने एवं उक्त वाहन पुनरीक्षणकर्ता को सुपुर्दगी में दिए जाने की मांग की गई। निरीक्षण्कर्ता े विद्वान अधिवक्ता द्वारा प्रस्तूत माननीय मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश की प्रतिलिपि के अनुसार यह स्थिति स्पष्ट है कि खाद्य एवं अनाज प्रतिषेध अधिनियम के अंतर्गत आबकारी अधिनियम के अनुरूप ऐसा प्रावधान नहीं है कि जिला दंडाधिकारी को अंतरिम सुपुर्दगीनामा पर वाहन देने का अधिकार नहीं रहता है परंतु इस प्रकरण में विद्वान न्यायिक दंडाधिकारी द्वारा आवेदक का सुपुर्दगीनामा आवेदन इस आधार पर निरस्त नहीं किया है कि जिला मजिस्ट्रेट द्वारा वाहन को राजसात की कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई थी। अत: इस पुनरीक्षण में यह प्रश्न विचार योग्य नहीं है।