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Varsha_Batham


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भापति महोदय, मैं आपका आभारी हूं कि अपने मुझे बोलने का अवसर दिया। मैं कृषि और सिंचाई मंंत्री के अनुदानों की मांगों का समर्थन करने के लिए खड़ा हुआ हूँ। मैं कृषि मंत्री को बधाई देना चाहता हूँ कि आज पहली बार खेती की तरफ कुछ ध्‍यान दिया गया है और गांव तथा खेती को प्रधान बनाने की बात कही गई है। वैसे गांधी जी पहले भी कहा करते थे कि गांवों को प्रधान बनाने से ही देश की उन्‍नति होगी। गांधी जी से मेरा तात्‍पर्य महात्‍मा गांधी से है श्री साठे साहब के गांधी जी से नहीं। जिस व्‍यक्ति ने देश को तवाह किया है अगर उसको थोड़ी देर के लिए रोका गया तो साठे साहब को बैचेनी हो गई। और उन्‍होंने काम रोको प्रस्‍ताव पेश कर दिया। जब हम लोग जेल में 19 महीने रहे, जहां हमारे कई साथी मर गए तब साठे साहब की आत्‍मा कहां सो गई थी। वे उस समय भी तो लोकसभा के सदस्‍य थे। महोदय, अन्‍य गांवों की तरह किसानों को भी बुनियादी आवश्‍यकतायें होती हैं। मैं पिछली सरकार से पूछना चाहता हूँ कि क्‍या उसने पिछले साल में किसानों की किसी समस्‍या को हल किया क्‍या किसानों के लिए भोजन की ठीक व्‍यवस्‍था हुई? किसान अच्‍छा अन्‍न पैदा करता है लेकिन कुछ अधिक पैसा पाने की इच्‍छा से वह उस को बाजार में बेचता है और स्‍वयं मोटे अन्‍न पर गुजारा करता है। इसी तरह तीस साल के शासन में किसानों के लिए स्‍वास्‍थ्‍य का कोई प्रबन्‍ध नहीं हुआ। मैं नहीं समझता कि गांवों में किसानों की सुविधा के लिए कोई अस्‍पताल खोले गये हैं। गांवों में दस-बीस मील पर अगर कोई अस्‍पताल खुल गया हो तो उसकी दवाओं के बारे में जांच करने की आवश्‍यकता है। जब तक हम किसानों को शिक्षित नहीं करेंगे तब तक देश की प्रगति नहीं हो सकेगी। देहातों में हर जगह शिक्षा संस्‍थाएं भी खोलने की आवश्‍यकता है। बड़े-बड़े शहरों में ऋण दिये जाते हैं। घर बनाने की भी स्‍कीम चलायी जाती है लेकिन देहातों में किसानों के लिए कोई ऋण दिया जाता है और कोई घर बनाने की स्‍कीम चलाई जाती है। मैं सरकार से निवेदन करूंगा कि किसानों के रहने के लिए कोई व्‍यवस्‍था अवश्‍य करने की कृपा करें। कपड़े की भी उनके लिए समस्‍या होती है। किसान सारी रुई अपने खेतों में पैदा करता है लेकिन उसको कपड़ा सही दाम पर देने के लिए कोई ठीक व्‍यवस्‍था नहीं है। दुकानों पर जो कपड़ा उसे मिलता है वह ऊंचे दामों पर मिलता है। इसलिए कुछ ऐसी दुकानें खोली जायें जिन पर जो लोग रुई पैदा करते हैं, उनको उचित मूल्‍य पर कपड़ा दिया जाये और उनको आदेश दिये जायें कि लोगों को अच्‍छे से अच्‍छा न्‍याय दें। किसानों के लिए कोई सुरक्षा की व्‍यवस्‍था भी नहीं है। जो रक्षक हैं वे भक्षक बन जाते हैं। ऐसे कैसे देश बढ़ सकेगा।
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