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fatbatman
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हिंदू धर्म में ऐसी मान्यता है कि यमलोक पहुंचने पर चित्रगुप्त नाम के यम प्रतिनिधि सामने आते हैं और उस व्यक्ति के तमाम जीवन में किये हुए कामों का जिन्हें वह गुप्त रीति से भी करता रहा, चित्रगुप्त की भांति दृश्य दिखलाते हैं, यमराज उन कर्म को देख कर ही उन्हें स्वर्ग और नरक का अधिकार प्रदान करते हैं। शास्त्राकार इसी सन्दर्भ में यह भी बताते हैं कि हनन की हुई आत्मा नरक को ले जाती है और सन्तुष्ट हुई आत्मा दिव्य लोक प्रदान करती है। चित्रगुप्त जैसी कोई व्यवस्था का होना काल्पनिक सा लगता है, किन्तु आधुनिक शोधों ने उपरोक्त अलंकारिक कथानक में छिपी महत्वपूर्ण सच्चाई अगणित रेखायें पाई जाती हैं। विस्तृत विश्लेषण करने के बाव वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि जो व्यक्ति कर्मठ, क्रियाशील, सात्विक, सबसे प्रेम और सबका भला चाहने वाले होते हैं, उनके मस्तिष्क की यह रेखायें जले हुए बाल के सिरे की तरह कुण्ठित और लुंज पुंज थीं। मस्तिष्क के विश्व विख्यात शल्य चिकित्सक डॉ. विल्डर पेनफील्ड ने मस्तिष्क में एक ऐसे बैंड का पता लगाया है. जो रिकॉर्डिंग विधि के आधार पर काम करता है उनके अनुसार यह बैंड मस्तिष्क के उस भाग में है, जिसके बारे में अभी तक कुछ विशेष पता नहीं लगाया जा सका। स्मरण की प्रक्रिया के बारे में डॉ. विल्डर पेनफील्ड का कहना है कि वह काले रंग की दो बैंड में निहित है। वे बैंड लगभग पच्चीस वर्ग इन्च क्षेत्रफल के होते हैं। मोटाई इन्च के दसवें भाग जितनी होती है।