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Varsha_Batham
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अभियोजन का मामला संक्षेप में यह है कि दिनांक 15.09.2015 को दिन के लगभग 12 बजे फरियादी राधा जाटव और उसकी मां घर के अंदर कमरे में खाना खाने बैठी थी तभी आरोपी जीतू एवं प्रताप कुशवाह लाठी लेकर, राधा कुशवाह डण्डा लेकर घुस आये, जितेन्द्र ने उसे और उसकी मां को जातिसूचक मां-बहन की बुरी-बुरी गालियां दी, उसने गाली देने से मना किया तो जीतू ने उसकी मां को लाठी मारी जो उनके बांये हाथ की कलाई में लगी, प्रताप ने लाठी मारी जो उसकी मां के सिर में लगी, उसने अपनी मां को बचाया तो राधा ने बाल पकड़कर उसे पटक दिया और उसके सिर में तथा कमर में डण्डा मारा वह चिल्लाई तब तक दीपू कुशवाह एवं प्रकाश कुशवाह आ गये जिन्होंने लात घूसों से उसकी मारपीट की तथा प्रकाश ने सूरज के बांये पैर में डण्डा मारा तब तक राजवीर और दलवीर आ गये जिन्होंने उसे और उसकी मां को बचाया तब जितेन्द्र जाते समय बोला कि तूने थाने में रिपोर्ट की तो जान से मार डालूंगा, उसकी मोबाईल की चिप बंटी कुशवाह पर थी जिसे उसने मांगा था इसी कारण उसकी तथा उसकी मां की मारपीट की है। फरियादी ने अपनी मां रामबेटी और सूरज के साथ घायल अवस्था में आरक्षी केन्द्र डबरा उपस्थित होकर उक्त घटना की रिपोर्ट लेख करायी जिस पर से अपराध क्रमांक 570/2015 प्रदर्श पी-1 की प्रथम सूचना रिपोर्ट पंजीबद्ध की गई, फरियादी राधा, आहत रामबेटी और सूरज का चिकित्सीय परीक्षण कराया गया, आहत रामबेटी का एक्स-रे कराया गया। अनुसंधान में दिनांक 26.09.2015 को फरियादी राधा की निशादेही पर घटनास्थल का नक्शामौका प्रदर्श पी-3 बनाया गया, उसी दिनांक को फरियादी राधा जाटव, आहत रामबेटी, सूरज, राजवीर एवं दलवीर के कथन धारा 161 के प्रावधान के अंतर्गत उनके बताये अनुसार लेख किये गये। अनुसंधान में दिनांक 01.10.2015 को आरोपी के आधिपत्य से एक बांस की लाठी जप्त कर प्रदर्श पी-10 का जप्ती पंचनामा बनाया गया, फरियादी से उसका जाति प्रमाण पत्र प्रदर्श पी-3 लिया जाकर अनुसंधान पश्चात् अभियोग पत्र न्यायिक दण्डाधिकारी प्रथम श्रेणी डबरा, जिला ग्वालियर, श्री रोहित सिंह के न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से प्रकरण उपार्पण आदेश के द्वारा उपार्पित होकर इस न्यायालय के समक्ष निराकरण हेतु प्रस्तुत हुआ। मेरे पूर्वाधिकारी द्वारा आरोपीगण पर संहिता की धारा 452, धारा 323/34 के अपराध के आरोप विरचित किये गये, आरोपीगण ने अपराध अस्वीकार कर विचारण चाहा उनकी प्ली अंकित की गई, धारा-313 के प्रावधान के अंतर्गत किये गये परीक्षण में आरोपीगण ने स्वयं को निर्दोष होना व्यक्त करते हुए बचाव में किसी भी साक्षी का परीक्षण नहीं कराया है।