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Ganga_Bhosle
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याचिककर्ता भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत वर्तमान रिट याचिका के माध्यम से भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1994 ( संक्षेंप में उक्त अधिनियम की धारा 04 के तहत अधिसूचना 4 मार्च, 2003 और घोषण दिनांक 04.02.2003 को चुनौती देना चाहते हैं। 2004 उक्त अधिनियम की धारा 06 के तहत राम जहांगीरपूर दिल्ली में स्थित भूमि के संबंध में अधिग्रहण का सार्वजनिक उद्देश्य जैसा कि अधिसूचना में दर्शाया गया है जे.जे. समूहो का पनुर्वास है। याचिकाकर्ताओं का यह कि अधिसूचना में दर्शाया गया है जे.जे. समूहो का पुनर्वास है याचिकाकर्ताओं का मामला है कि जिन व्यक्तियों ने सार्वजनिक भूमि पर कब्जा कर लिया था उन्हें याचिकाकर्ताओं की अधिग्रहण करके पुनर्वास नहीं किया जा सकता है। वर्तमान रिट याचिकाओं की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अन्य बातों के साथ-साथ वजीरपुर निर्माता संघ बनाम यूओआई और अन्य मामले में इस न्यायालय की खण्डपीठ के निर्णय पर बहुत भरोसा किया गया था, 103(2003) उस निर्णय के संदर्भ में झुग्गी-झोपड़ी निवासियों ने पुनर्वास के लिये सरकारी भूमि पर अनाधिकृत रूप से बैठते हैं ओर उन्हें स्थानांतरित करने के लिए भूमि के भूखण्ड आवांटित किये जा रहे थे उस आदेश के क्रियात्मक भाग को पुन: प्रस्तुत करना उपयोगी होगा जो इस प्रकार है इस प्रकार हमारा यह सुविचार है कि ऐसी नीति के जारी रहने से कोई सामाजिक उद्देश्य पूरा नहीं होता है। किसी भी सामाजिक मानदंड के बिना ऐसी नीति अवैध और मनमानी है और हम यततद्वारा उसे रद्द करने के लिये आगे बढ़ते है, जिसके लिये झुग्गी झोपड़ी वासियों को कब्जा करने के लिये वैकल्पिक स्तर प्रदान करने की आवश्यकता होती है। यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि उत्तरदाताओं के लिये यहां एक वैध मानदंड आधार पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के पनुर्वास के लिये एक नीति तैयार करने के लिए खुला होगा लेकिन मानदंड सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण नहीं हो सकता है हालांकि यह सवाल बना हुआ है कि 1990 में मूल रूप से नीति तैयार किये जाने के बाद से बहुत पानी बह गया है। इस बात को ध्यान में रखते हुये अब कौन से निर्देश जारी किये जाते हैं हमने बार में दिेये गये सुझावों पर विचार किया है और मौजदा समस्या पर खुद को लागू किया है। उपरोक्त नीति को रद्द करते समय हम निम्नलिखित परिणामी निर्देश देना उचित समझते है। कटऑफ तीथि 1990 के रूप में रखी जानी चाहिए और उन सभी व्यक्तियों को सत्यापन किया जाना चाहिए जिन्हें वैकल्पिक साइट आवांटित की गई है। आवश्यक कार्य आज से 6 माह की अवधि के भीतर तथा किसी भी व्यक्ति या किसी भी स्थिति में 30.06.2003 तक कर लें।