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sharda12345
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विचारण के उपरांत निर्णय दिया जाता है निर्णय के पश्चात् दोषसिद्ध व्यक्ति के पास अपील का अधिकार होता है तथा अपील के अधिकार के बाद बंत में जब व्यक्ति दोषसिद्ध हो जाता है तथा अपील के अधिकार समाप्त हो जाते हैं ऐसी परिस्थिति में अपराधियों को दिए गए दंड के निष्पादन का प्रश्न आता है। सीआरपीसी के अध्याय 32 के अंतर्गत इस संहिता के अंतर्गत दिए गए दंडादेशों का निष्पादन निलंबन, परिहार और लघुकरण से संबंधित विधि दी गयी है। लेखक इस लेख के माध्यम से मृत्यु दंडादेश, कारावास और जुर्माना के संबंध में दी गयी प्रक्रिया का सारगर्भित उल्लेख कर रहा है। दंड प्रक्रिया संहिता की इस धारा के अंतर्गत धारा 368 के अधीन पारित किए गए आदेश के निष्पादन के बारे में उपबंध हैं। जब उच्च न्यायालय संपुष्टि के लिए प्रेषित मृत्यु दंडादेश की पुष्टि कर देता है। कोई भी मृत्यु दंडादेश जो सेशन न्यायालय द्वारा दिया जाता है उसकी पुष्टि उच्च न्यायालय द्वारा की जाती है।
धारा 413 इस संबंध में उल्लेख कर रही है कि जब उच्च न्यायालय किसी मृत्यु दंडादेश की संपुष्टि कर देता है तो सेशन न्यायालय द्वितीय अनुसूची में दिए गए प्रारूपों में प्रारूप संख्या के अनुसार वारंट तैयार करके उसे जेल के भारसाधक अधिकारी को भेज देता है, जिसमें अभियुक्त को परिरुद्ध रखा गया है। न्यायालय द्वारा जेल के अधिकारियों को उच्च न्यायालय के आदेश का निष्पादन करने हेतु आदेशित किया जाता है।