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न्यायालयीन प्रकरण की प्रकृति के आधार पर माननीय न्यायाधीश महोदय द्वारा अपराधी को अपराध के अनुरूप दण्ड अधिरोपित किया जाता है। अभियुक्त एवं अभियोजन यह प्रक्रियाएं न्यायालय से संबद्ध प्रक्रियाएं हैं। न्यायालय के समक्ष अपराधी को प्रस्तुत करने हेतु अभियोजन पत्र पर अपराधी का संपूर्ण विवरण दिया जाता है। इस विवरण में अपराध की संपूर्ण जानकारी होती है जो अपराधी द्वारा घटित किया गया है। जैसे कि अपराधी का नाम, अपराधी के पिता का नाम, अपराधी के निवास स्थान का पता, अपराधी के द्वारा अपराध घटित किये जाने वाले स्थल का संपूर्ण विवरण, अपराध में लगायी गयी भारतीय दण्ड संहिता या दण्ड प्रक्रिया संहिता की धाराएं जो अपराध की प्रकृति के अनुरूप है। अपराध का संपूर्ण विवरण जैसे एक गांव में दो भाईयों के मध्य हुए विवाद में एक भाई द्वारा दूसरे भाई को जान से मारने की कोशिश की गई जिसमें दूसरे भाई ने पहले भाई के खिलाफ पुलिस थाना स्थानक में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई। रिपोर्ट दर्ज होने के पश्चात पुलिस के द्वारा कार्यवाही संचालित करते हुए दूसरे भाई को गिरफ्तार करने हेतु पुलिस कांस्टेबल भोलाराम को गांव में भेजा। इस गांव में पूछताछ की गई जहां अपराधी के खिलाफ अपराध किया जाना सिद्ध हुआ। उसे गिरफ्तार किया गया एवं माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। मुकदमा कायम हुआ कायमी के दौरान अपराधी ने एक और अपराध को अंजाम देने की कोशिश की एवं माननीय न्यायाधीश महोदय के समक्ष ही माननीय न्यायाधीश महोदय एवं माननीय न्यायालय की अवमानना करते हुए अपने भाई पर पुन: हमला किया। माननीय न्यायाधीश महोदय ने तत्संबंध में तत्काल आदेश प्रख्यापित कर अपराधी को पुलिस हिरासत में लेने हेतु आदेशित किया एवं अपने व्यक्तव्य में कहा कि इस प्रकार से माननीय न्यायालय की अवमानना एवं किये गये अपमान हेतु अपराधी को पूर्ववत अपराध का मुकदमा कायम रखते हुए वर्तमान समयावधि में हुए अपराध के लिये 2 साल कैदे बामुशक्कत एवं 40000 रुपये का जुर्माना अध्यारोपित किया जाता है एवं पूर्ववत अपराध हेतु नवीन पेशी दिनांक नियत कर अपराधी को पुलिस द्वारा हथकड़ी में बॉंधकर लाने हेतु आदेशित किया गया। इस आदेश के द्वारा पुलिस ने उक्त अपराधी को हथकड़ी बॉंधकर आगामी नियत पेशी दिनांक पर माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। माननीय न्यायालय ने सर्वप्रथम उक्त अपराधी के द्वारा माननीय न्यायाधीश महोदय एवं माननीय न्यायालय की अवमानना के प्रकरण में कठोर शब्दों में निन्दा करते हुए कहा कि इस अपराधी के द्वारा पूर्व पेशी दिनांक को जिस प्रकार घोर दण्डनीय अपराध किया गया ऐसे अपराधी को माननीय न्यायालय में पूर्ण पुलिस हिरासत में लाया जाना ही सही सिद्ध होगा। पूर्ववत प्रकरण की सुनवाई प्रारंभ हुई जिसमें उक्त अपराधी पुन: दोषसिद्ध पाया गया और माननीय न्यायाधीश महोदय द्वारा पूर्ववत अपराध के लिये दी गई सजा को कायम रखते हुए एक साल कैदे बामुशक्कत नियत की गई।