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जमानत प्रपत्र सत्र न्यायालय के आदेश दिनांक 03.04.2018 अनुसार अंतरण पर प्राप्त जिसके साथ मुख्य न्यायिक सागर से न्यायालय से दांडिक प्रकरण क्रमांक 7059/13 को अभिलेख संलग्न है। आवेदक बंसत अहिरवार की ओर से श्री दिनेश चिरवरिया की उपस्थिति अनावेदक मध्यप्रदेश राज्य की ओर से श्री एम.बी. अवस्थि अपर लोक अभियोजक उपस्थित हुए। आवेदक बंसत अहिरवार की ओर से प्रस्तुत जमानत आवेदन अंतर्गत धारा 439 दण्ड प्रक्रिया संहिता में बताया गया है कि पूर्व पेशी दिनांक पर भूलवश आवेदक उपस्थित नहीं हो सकता था जिस कारण से उसके विरूद्ध गिरफ्तारी वांरट जारी हो गया था। आरोपी द्वारा कोई अपराध कारित नहीं किया गया है। आरोपी को लंबे समय तक न्यायिक अभिरक्षा में ननिरक्त रखे जाने पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है। आवेदक की चल अचल संपत्ति न्यायालय के क्षेत्राधिकार में स्थित है। उक्त आधारों पर जमानत पर रिहा किए जाने का निवेदन किया गया। आवेदक बंसत की ओर से प्रस्तुत जमानत आवेदन के समर्थन में आवेदक की पत्नी श्रीमति कंचन का शपथपत्र प्रस्तुत किया गया है जिसमें यह बताया गया है कि अन्य कोई आवेदन समवर्ती अथवा उच्च न्यायालय में न तो निराकृत हुआ है और नही लंबित है। जमानत आवेदन पर उभयपक्ष को सुना गया। आवेदक आरोपी की ओर से उपस्थित अधिवक्ता श्री दिनेश चिरवरिया द्वारा तर्क में बताया गया है कि आरोपी अन्य मामलों में न्यायिक अभिरक्षा में निरूद्ध था और इस कारण से नियम समय पर उपस्थित नहीं हो सका था। आरोपी स्थानीय निवासी है। प्रकरण के निराकरण में समय लगने की सभावना के आधार पर जमानत दिए जाने का निवेदन किया गया जिसका विरोध अपर लोक अभियोजन श्री अवस्थि द्वारा किया गया। संबंधित दांडिक प्रकरण का अवलोकन किया गया। आवेदक आरोपी बंसत सिंह अन्य आरोपीगण के विरूद्ध अपराध क्रमांक 82/2013 धारा 379 भारतीय दण्ड संहिता का अभियोगपत्र ददिनांक 30.12.2013 को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया है। 16.04.2014 को आवेदक के आरोपी के अनूपस्थित हो जाने के कारण उसके विरूद्ध गिरफ्तारी वांरट जारी किया गया था और आगामी दिनांक 25.04.2014 को गिरफ्तारी वांरट ताकि प्राप्त न होने के कारण आरोपी के भविष्य में न जमानत आवेदन क्रमांक 451/18 मिलने की संभावना के आधार पर उसके विरूद्ध स्थायी वांरट जारी किया जाता प्रश्नगत मामले में निरूद्ध है। प्रकरण के निराकरण में समय लगने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। प्रकरण के समस्त तथ्यों को दृष्टि गत रखते हुए आवेदक आरोपी को जमानत का लाभ दिया जाना उचित प्रतीत होता है।