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shahidman009238
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मामले के निरीक्षण के संबंध में रेडियो मैसेज से निर्वहन करवाये जाने को लेकर स्पष्टीकरण प्रस्तुत न करने के आधार पर पुनरीक्षणकर्ता के विरुद्ध न्यायालय के आदेश की अवहेलना किया जाना निर्धारित करते हुए उक्त विलंब के लिए मध्यप्रदेश राज्य पर 500 रुपए का परिव्यय अधिरोपित कर उक्त राशि की वसूली थाना प्रभारी के वेतन से किया जाकर न्यायालय में जमा कराये जाने तथा इस दंड की प्रविष्टि एवं एवं इस आशय की टिप्पणी उनकी सेवा पुस्तिका में भी किए जाने का आदेश दिया गया है। प्रतिवादी क्रमांक 1 की ओर से प्रस्तुत वादोत्तर में वादी के वादपत्र के अभिवचनों को अस्वीकार करते हुए वादग्रस्त भूमि नजूल भूमि होना तथा उसके संबंध में नगर पालिका को अतिक्रमण को नियमित करने तथा लोकहित में सार्वजनिक नाली पर से स्थाई निर्माण को हटाने का वैधानिक क्षेत्राधिकार होना बतलाते हुए इसी अधिकार के अधीन नरेश अग्रवाल की शिकायत के संबंध में अपर कलेक्टर के पत्र दिनांक 28 अगस्त 2014 के आधार पर नगर पालिका द्वारा धारा 223 एवं 187 नगर पालिका अधिनियम के अंतर्गत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए वादग्रस्त सूचनापत्र वादी को प्रेषित किए जाने के अभिवचन किए गए हैं। वादी को प्रतिवादी क्रमांक 1 के विरुद्ध कोई वाद कारण उत्पन्न नहीं होना अभिवचनित करते हुए वादी का वाद निरस्त करने की प्रार्थना की गई है। वादग्रस्त मामले 3 के सूचना पत्र के संबंध में वादी साक्षी क्रमांक कृष्णा ने अपने प्रतिपरीक्षण के दौरान चरण संख्या 19 में यह स्वीकार किया है कि मनोरमा द्वारा जो भूमि स्वीकृत कराई गई थी उसी में खुली हुई भूमि पर नगर पालिका ने सड़क एवं नाली का निर्माण किया है। उक्त साक्षी ने चरण संख्या 22 में यह भी स्वीकार किया है कि उसे उसके द्वारा क्रय किए गए तथा मनोरमा वर्मा द्वारा बेचे गए सभी मकान नजूल की भूमि पर स्थित हैं। उक्त साक्षी ने चरण संख्या 24 में यह भी स्वीकार किया है कि नजूल निरीक्षक द्वारा मौके पर निरीक्षण के समय सार्वजनिक नाली और सड़क पर उसके द्वारा अतिक्रमण किया जाना पाया गया था तथा सार्वजनिक जगह पर अतिक्रमण किए जाने के कारण ही नगर पालिका द्वारा धारा 223 और 187 नगर पालिका अधिनियम के अंतर्गत उसे नोटिस दिया गया।