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sachin1991
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हम कई लोगों को ये कहते हूए सुनते हैं कि आज मैं इतने गुस्से में था कि खाते-खाते पता ही नहीं चला और मैने दो रोटी ज्यादा खा लीं । आज की जीवनशैली में ये बहुत ही आम बात हो गई है । वैसे तो सामान्यतः जब भूख लगती है तभी भोजन किया जाता है लेकिन लगातार बढ़ रहे तनाव और चिंता के कारण भी लोग सामान्य से अधिक खाना खाने लगे हैं । तनाव जैसे जैसे बढ़ता जाता है कुछ खाने की चाह भी बढ़ना शुरू हो जाती है और इस क्रेविंग को शांत करने के लिए व्यक्ति अल्लम-गल्लम कुछ भी खा लेता है इसे इमोशनल ईटिंग कहते हैं । इमोशनल ईटिंग में लोग चाकलेट , पिज्जा , आइसक्रीम , स्वीट्स और जंक फूड को अपने जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बना लेते हैं । उन्हे लगता है कि इन खाद्य पदार्थों के सेवन से उनका तनाव दूर हो सकता है लेकिन इस आदत के कारण सेहत को कितना नुकसान होता है इस ओर ध्यान नहीं दिया जाता । बीमारियों को न्योता यह भी देखा गया है कि कुछ लोग अवसाद और अच्छा जरिया मानते हैं। उन्हें लगता है कि कुछ खा लेने से उनकी नकारात्मक भावनाएं जैसे गुस्सा , डर , नाराजगी कम या शांत हो जाएंगी । लेकिन ओवर ईटिंग या किसी भावना को दबाने के लिए खाने को विकल्प बनाना मोटापा, डायबिटीज, डिप्रेशन जैसी बीमारियों की ओर धकेल देता है । कुछ उपाय आजमा सकते हैं - नियमित रूप से व्यायाम करें । इससे तनाव से राहत मिलेगी, तनाव के दौरान कुछ खाने का मन करे तो फल, सब्जियों का रस, सलाद, सूखे मेवे आदि का सेवन करें । ये सेहतमंद तो होते ही हैं साथ ही तनाव कम करने में मदद भी करते हैं। इनके सेवन की आदत धीरे धीरे ही डलेगी, खाने का रूटीन बनाएं जब कभी इमोशनल इटिंग की जरूरत महसूस हो, तो अपने वजन और डाइट को याद करे , मन किसी काम या शोक मे लगाएँ जैसे पुस्तक पढ़ना , टहलना, बागवानी आदि , इमोशनल ईटिंग को रोकने या नियंत्रित करने के लिए विशेषज्ञ की मदद भीले सकते हैं ।