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lakhan123
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चुनाव में राजनीतिक दल मुफ्त की योजनाओं , बिजली , पानी, आदि के वादे करते हैं । इनसे सरकार बनने के बाद राज्य की अर्थव्यवस्था को इनसे नुकसान पहुंचता है । इस पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है । चीफ जस्टिस एनवी रमना , जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस हिमा कोहली की बेंच ने कहा कि निर्वचन आयोग ने इस मसले पर पहले कदम उठाए होते तो आज ऐसी नौबत नहीं आती । आज शायद ही कोई पार्टी मुफ्त की योजनाओं के चुनावी ङतकंडे छोड़ना चाहती है । इस मुद्दे को हल करने के लिए विशेषज्ञ कमेटी बनाने की जरूरत है , क्योंकि कोई भी दल इस पर बहस नहीं करना चहेगा । सुप्रीम कोर्ट ने केंन्द्र सरकार और चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह वित्त आयोग , नीति आयोग , रिजर्व बैंक , लाँ कमीशन और विभिन्न दलों के प्रतिनिधियों संग बैठक करे । विशेषज्ञ कमेटी के प्रारूप को लेकर सुझाव दे अगली सुनवाई 11 अगस्त को होगी भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय ने जनहित याचिका दायर की है । इसमें मांग की है कि चुनाव में उपहार और सुविधाएं मुफ्त बांटने का वादा करने वाले दलों की मान्यता रद्द की जाए । कोर्ट ने याचि और सुझाव देने के लिए कोर्ट की तरफ से आमंत्रित कपिल सिब्बल से कहा है कि वे भी 7 दिन में सुझाव दें कि इसे कैसे हल किया जा सकता है । इसके बाद कोर्ट तय करेगा कि विशेषज्ञ कमेटी में किन्हें शामिल करना है ।