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shahidman009238


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िचले दो न्‍यायालयों ने यह निष्‍कर्ष निकाला है कि वादी के पास आनुकल्पिक वास सुविधा नहीं है। वादी मकानदारिन के कब्‍जे में अविभक्‍त कुटुंब की वास सुविधा है और उसके कब्‍जे में आनुकल्पिक वास सुविधा होने का निर्णय करने के लिए उस पर विचार किया जाना चाहिए, इस तर्क को विनिर्दिष्‍ट रूप से लिखित कथन में उठाया नहीं गया था और इसलिए निचले न्‍यायालय इस मुद्दे पर साक्ष्‍य पर अथवा उस आधार पर किए गए तर्क पर विचार करने के लिए कर्तव्‍यबद्ध नहीं थे। फिर भी, यह मत व्‍यक्‍त किया गया है कि विचारण न्‍यायालय ने निष्‍कर्ष के पैरा 14 में और प्रथम अपीलीय न्‍यायालय ने निर्णय के पैरा 9 में मामले के इस पहलू पर विचार किया था और आनुकल्पिक रूप से यह अभिनिर्धारित किया था कि उसके बावजूद वादी और उसके कुटुंब की, जिसमें उसके अलावा उसका पति, दो पुत्र और पुत्रियां हैं, वास्‍तविक आवश्‍यकता बनी रही है। छोटा बाजार में वादी के पति के एक दूसरे घर की बावत् निचले न्‍यायालय ने यह अभिनिर्धारित किया था कि यह पर्याप्‍त दूरी पर है और उसके एक भाग का गैर-आवासीय प्रयोजन के लिए उपयोग किया जाता है और वह वादी के आवास के लिए उपयुक्‍त नहीं है। इस दृष्टि से ऊपर विरचित विधि के द्वितीय सारवान प्रश्‍न के विरुद्ध निष्‍कर्ष यह होगा कि निचले न्‍यायालयों ने वादी भू-मकानदारिन प्रत्‍यर्थी के लिए आनुकल्पिक वास सुविधा की अनुपलब्‍धता के प्रश्‍न पर वादी के पक्ष में निष्‍कर्ष करके अभिलिखित विधि की कोई त्रुटि नहीं की थी। साक्ष्‍य का पुनर्मूल्‍यांकन करने और यदि आवश्‍यक हो तो समुचित मामले में जहां निचले न्‍यायालयों ने साक्ष्‍य का समुचित रूप से मूल्‍यांकन नहीं किया था जैसा कि हीरालाल वाले पूर्वोक्‍त मामले में अभिनिर्धारित किया था इस न्‍यायालय की शक्ति से इंकार नहीं किया जा सकता है, किंतु ऐसा किए जाने के पूर्व ऐसा करने के लिए कोई मामला बनाया जाना चाहिए। प्रस्‍तुत मामले में विचारण न्‍यायालय ने विवाद्यक संख्‍या 1 के विरुद्ध स्‍वयं वादी कन्‍हैयालाल के साक्ष्‍य पर निर्णय के पैरा 6 में अन्‍य विवाद्यकों के साथ चर्चा की थी। यह निष्‍कर्ष निकाला था कि प्रतिवादी वादी को सामान्‍य प्रसुविधाओं जैसे कि शौचघर, नालियां और नल के प्रयोग से निवारित कर रहा है।
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