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निर्णय में अभिलेख पर आई साक्ष्य का विश्लेषण योग्य विचारण न्यायालय द्वारा उचित रूप से नहीं किये जाने का मुख्य आधार अपीलार्थी की ओर से यह प्रकट किया गया है कि प्रत्यर्थी के ओर से पूर्व में भी उसे अन्य खेप की राशि की मांग का नमूना प्रदर्श पी 04 प्रेषित किया जाना बताया गया है, जिसमें अपीलार्थी को प्रत्यर्थी द्वारा रुपये 2 लाख राशि उधार देने और उस पर रुपये 10 हजार ब्याज सहित अपीलार्थी द्वारा प्रत्यर्थी को 03 के माध्यम से देने के तथ्य, पूर्व में प्रे्षित सूचना पत्र में उल्लेखित है तथा योग्य विचारण न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत परिवाद के विवादित से प्रदर्श पी 01 उल्लेखित है, जबकि प्रत्यर्थी द्वारा अपीलार्थी को पूर्व में प्रेषित सूचना पत्र प्रदर्श पी 04 में यह विवादित चेक उल्लेखित किया गया है, मात्र राशि 65 हजार रुपये संव्यवहार के तथ्य प्रस्तुत परिवादी चेक उल्लेखित किया गया है। प्रस्तुत परिवाद में लेख किये गये है, जो कि पूर्व में प्रस्तुत परिवाद से भिन्न होकर विरोधाभासी है। अपील के आधारों में से मुख्य रूप से प्रश्नगत चेक प्रदर्श डी 01 किसी ऋण अथवा दायित्व के अधीन जारी किये जाने के बिंदु मात्र को मुख्य रूप से चुनौती दी गई है। उक्त मुख्य आधार पर में से योग्य विचारण न्यायालय के समक्ष आई साक्ष्य तथा परिवाद में उल्लेखित अस्तित्व और परिवाद में विवादित क्षेत्र प्रदर्श पी 01 किसी ऋण अथवा विधिक दायित्व के अधीन उन्मोचन के तह त विचार किया जाये तो परिवादी पर यह भार है कि वह प्रथम दृष्टया अपने प्रमाण का प्रश्न उसके ऊपर होने वाले सक्रिय होने के लिए यह प्रमाणित करें कि उसके द्वारा कोई राशि अपीलार्थी को दी गई थी और विवादित चेक ऐसे किसी ऋण अथवा विधिक दायित्व के उन्मोचन हेतु उसे प्रदान किया गया था, तब यहां यह देखा जाता है कि क्या ऐसा कोई संव्यवहार प्रत्यर्थी प्रथम दृष्टया उसके ओर से प्रसतुत साक्ष्य के माध्यम से विचारण न्यायालय के समक्ष प्रमाणित कर सका है सर्वप्रथम योग्य विचारण न्यायालय के मसमक्ष प्रस्तुत परिवाद तथ्य पर उल्लेखित तथ्यों पर विचार किया जाये तो परिवाद पक्ष के प्रस्तुत तथ्य के 65 हजार रुपये राशि उधार लिये जाने का विवादित तथ्य लेख है। परिवाद की कंडिका 02 में परिवादी द्वारा अभियुक्त की मांग के तहत नगद 65 हजार रुपये देने का तथ्य उल्लेखित है। परिवाद की कंडिका 03 में परिवाद की कंडिका 02 प्रदत्त राशि की अदायगी हेतु अभियुक्त ने उसका बैंक ऑफ इंडिया शाखा का एक चेक परिवादी को प्रदान किया जाना और कंडिका 04 में यह चेक खाते में अपर्याप्त राशि के आधार पर अनाधिक हो जाने के तथ्य लेख किये है।