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्रस्‍तुत मामले में सहायक उप-निरीक्षक अभियोजन साक्षी 03 का मुख्‍य परीक्षण में कहना है कि उक्‍त दिनांक को आरोपी को हथियार सहित गिरफ्तार किया था आरोपी के कब्‍जे से हथियार जब्‍त किया था जप्‍ती पंचनामा प्रदर्श 01 है जिसके प्रत्‍येक भाग पर उसके हस्‍ताक्षर है। आरोपी को पंचों के समक्ष गिरफ्तार कर गिरफ्तारी पंचनामा प्रदर्श 02 बनाया था जिसके भी प्रत्‍येक भाग पर उसके हस्‍ताक्षर है। थाने पर अपराध दर्ज किया था जो अपराध क्रमांक 66/15 की प्रथम सूचना रिपोर्ट के द्वारा लेखबद्ध की गई जो प्रदर्श 05 है जिसके भी प्रत्‍येक (क) भाग पर उसके हस्‍ताक्षर है। प्रतिपरीक्षण में सहायक उप-निरीक्षक अभियोजन साक्षी 03 ने स्‍वीकार्य किया कि वह प्रकरण में अभियोगी है तथा प्रकरण के विवेचना के उसके द्वारा की गई है घटना के दिन वह कहां गया था, कब आया इस संबंध उमें उसने रोजनामचा की कोई प्रति पेश नहीं की है और ही वह बयान देते समय साथ लाया है प्रथम सूचना रिपोर्ट प्रदर्श 05 के कॉलम नंबर 02 में जब्त की हुई संपत्ति का कोई विवरण नहीं दिया गया है। इस तथ्‍य को अस्‍वीकार्य किया है कि जप्‍ती की कार्यवाही नहीं की थी। आरोपी को उक्‍त प्रकरण में झूठा फंसाया है तथा संपूर्ण कार्यवाही थाने पर बैठकर की है। न्‍यायदृष्‍टांत इस बाबत् है कि अपराध का अन्‍वेषण एवं मामला पंजीबद्ध अभिगृहण अधिकारी द्वारा ही किया गया था तब दोषसिद्धि अपास्‍त की गई। वर्तमान प्रकरण में भी अभियोगी द्वारा ही संपूर्ण विवेचना की गई हैं। विधि अनुसार अभियोगी को प्रकरण में स्‍वयं विवेचना करने से बचना चाहिए था। अत: अभियुक्‍त उक्‍त न्‍यायदृष्‍टांत का लाभ प्राप्‍त करने का पात्र है। साक्षी अभियोजन साक्षी 01 एवं अभियोजन साक्षी 02 ने पुलिस की जब्‍ती गिरफ्तारी कार्यवाही का समर्थन नहीं किया है। इस प्रकार दोनों ही साक्षी अभियोजन तथ्‍यों का समर्थन नहीं करते हैं। अभियोजन की ओर से दोनों साक्षियों को धारा 154 साक्ष्‍य अधिनियम के अंतर्गत पक्ष विरोधी घोषित कर सूचक प्रश्‍न पूछे जाने पर अभियोजन साक्षी 01 ने पुलिस को प्रदर्श 03 अभियोजन साक्षी 02 ने प्रदर्श 04 का पुलिस कथन देने से इंकार किया है। पुलिस द्वारा की गई कार्यवाही का समर्थन स्‍वतंत्र साक्षियों द्वारा नहीं किया गया है। ऐसी स्थिति में जब्‍ती गिरफ्तारी का तथ्‍य प्रमाणित नहीं पाया जाता है। न्‍यायालय द्वारा यह ठहराया गया है कि प्रकरण में स्‍वयं फरियादी की श्रेणी में आता है तथा विवेचना की उसके द्वारा की गई है जो कि विधिपूर्ण नहीं है। परिणामस्‍वरूप पुलिस द्वारा की गई कार्यवाही संदेहास्‍पद हो जाती है।
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