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aniketkahar89


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धीनस्‍थ अपीलीय न्‍यायालय ने यह निष्‍कर्ष अभिलेख की सामग्री के आधार पर निकाला था। वादी स्‍वयं का यह मामला था कि प्रतिवादीगण वादग्रस्‍त भवन में बंधकदार के रूप में अधिवासी थे। ऐसी स्थिति में सिद्धि के भार को स्‍पष्‍ट किया गया। मध्‍यप्रदेश उच्‍च न्‍यायालय ने स्‍पष्‍ट किया कि ऐसी स्थिति में यह दर्शित करने का भार वादीगण पर था कि वे बंधक का मोचन कराने के अधिकारी थे और उनका वाद परिसीमा की विहित अवधि के भीतर है। इस भार का निर्वहन करने में वादीगण विफल रहे थे। जहाँ केन्‍द्रीय सरकार ने राजपत्र में अधिसूचना द्वारा किसी विदेशी राज्‍यक्षेत्र के बारे में यह घोषणा की है कि उस विदेशी राज्‍यक्षेत्र में वास्‍तव में और स्‍वेच्‍छा से निवास करने वाले या कारबार करने वाले या अभिलाभ के लिए स्‍वयं काम करने वाले प्रतिवादियों पर तामील किए जाने वाले समन विदेशी राज्‍यक्षेत्र की सरकार के ऐसे अधिकारी को जो केन्‍द्रीय सरकार द्वारा विनिर्दिष्‍ट की जाए, भेजे जा सकेंगे और यदि ऐसा अधिकारी किसी ऐसे समन को उसके द्वारा किए गए तात्‍पर्यित इस पृष्‍ठांकन के सहित लौटा देता है कि समन की तामील प्रतिवादी पर की जा चुकी है तो ऐसा पृष्‍ठांकन तामील का साक्ष्‍य समझा जाएगा। जब कभी पत्रों की या वार्तालापों की आवली से या अन्‍यथा कई परिस्थितियों से किन्‍हीं व्‍यक्तियों के बीच में की कोई संविदा या अन्‍य संबंध विवक्षित किया जाना है तब ऐसी संविदा या संबंध को तथ्‍य के रूप में अभि‍कथित करना और ऐसे पत्रों, वार्तालापों या परिस्थितियों को ब्‍यौरेवार उप‍वर्णित किए बिना उनके प्रति साधारणतया निर्देश करना पर्याप्‍त होगा। जहाँ स्‍थावर संपत्ति दो या अधिक न्‍यायालयों की अधिकारिता की स्‍थानीय सीमाओं के भीतर स्थित एक सम्‍पदा या भूधृति के रूप में है वहाँ पूरी सम्‍पदा या भूधृति को ऐसे न्‍यायालयों में से काई भी एक न्‍यायालय कुर्क कर सकेगा और उसका विक्रय कर सकेगा। अधीनस्‍थ अपीलीय न्‍यायालय ने यह निष्‍कर्ष अभिलेख की सामग्री के आधार पर निकाला था। वादी स्‍वयं का यह मामला था कि प्रतिवादीगण वादग्रस्‍त भवन में बंधकदार के रूप में अधिवासी थे
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