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इस अभियुक्त की गिरफ्तारी ज्ञापन प्रदर्श पी-10 के अनुसार गिरफ्तारी की गई थी। गिरफ्तारी के समय तलाशी ली गई थी और तलाशी रिपोर्ट अभिलेख पर उपलब्ध है। तलाशी के दौरान इस अभियुक्त के कब्जे से प्रश्नगत घटना से संबंधित समाचार पत्र की एक पत्रक पाई गई थी। रिपोर्ट के अनुसार घटनास्थल के सत्यापन की भी रूपरेखा बनाई गई थी। जिसमें अभियुक्त ने संपूर्ण घटना और प्रश्नगत अपराध में उसके भाग लेने की बात को सत्यापित किया था। गिरफ्तारी ज्ञापन के अनुसार इस अभिुयक्त को दो तारीख को गिरफ्तार किया गया था। घटनास्थल के सत्यापन की रिपोर्ट है जिसमें अभियुक्त ने घटना का सत्यापन किया है और घटना में अपने भाग लेने की बात को स्वीकार किया है। रेलवे स्टेशन से दो सौ मीटर की दूरी पर घटनास्थल के निकट अभियुक्त ने घटना को कारित किया था। अपील में अभियुक्त की ओर से विद्वान अभिभाषक ने यह दलील दी कि वे परिस्थितियां जिनका विद्वान विचारण न्यायालय ने अवलंब लिया है कोई साक्ष्यिक महत्व नहीं है और उनके आधार पर किसी भी रीति में अभियुक्त का दोषसिद्ध होना संभव नहीं है। यह कथन किया गया है कि यद्यपि उन कागजों जो इस अभियुक्त के मकान से लिए गए थे पर लेखन अविवादग्रस्त बताए गए हैं, किंतु तथ्य की दृष्टि से अभिलेख पर यह तय करने के लिए कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं है कि नमूना दस्तावेज अभियुक्त द्वारा लिखे गए थे। यह भी दलील दी गई है कि हस्तलेख विशेषज्ञ की रिपोर्ट एक राय के सिवाय कुछ नहीं है और यह वैज्ञानिक अध्ययनों पर आधारित न होकर केवल मताभिव्यक्तियों पर आधारित है और इससे हस्तलेख विशेषज्ञ द्वारा दी गई राय को दोषसिद्धि का आधार नहीं बनाया जा सकता। यह भी दलील दी गई है कि बरामदगी अभियुक्त की प्रेरणा पर की गई बताई गई है और एक बात विश्वसनीय नहीं है कि प्रदर्श पी-40 के अनुसार इस्पात की छड़ विश्वसनीय साक्षियों की गैर-मौजूदगी में बरामद की गई थी। इस अभियुक्त के अभिभाषक के अनुसार अभियुक्त को घटना की तारीख से चार मास से पांच मास व्यतीत हो जाने के पश्चात् गिरफ्तार किया गया था और उसके पास एक छोटी सी वस्तु की बरामदगी की गई थी और गलत शनाख्त परीक्षण को ध्यान में रखते हुए यह अपील भी विश्वसनीय नहीं है। विद्वान अभिभाषक द्वारा यह तर्क किया गया है कि यद्यपि साक्षियों को पक्षद्रोही घोषित किया गया था और उनसे सूचक प्रश्न भी किए गए थे परंतु सूचक प्रश्नों के उत्तर में भी साक्षियों ने घटना से संबंधित कोई तथ्य लिखित नहीं कराए।